सत्य निकेतन हादसे पर भड़के कांग्रेस नेता, बोले- भाजपा सरकार पर बिल्डिंग माफिया का दबाव

New Delhi, 7 सितंबर . सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली Government की कार्रवाई पर कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने दिल्ली की भाजपा Government और Chief Minister रेखा गुप्ता पर बिल्डिंग माफिया के दबाव का आरोप लगाया और सेक्शन 56जे के तहत कमिश्नर समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

कांग्रेस नेता ने कहा, “भाजपा Government पर बहुत बिल्डिंग माफिया का बड़ा दबाव है कि वो अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन ना लें. मात्र सस्पेंड करने से कुछ नहीं होता. ये अधिकारी दो महीने में फिर वापस अपनी नौकरी पर, इससे अच्छे पद पर आ जाएंगे. सेक्शन 56जे के तहत कमिश्नर समेत इन सभी भ्रष्ट अधिकारियों को नौकरी से निलंबित करना चाहिए. कल उन्हीं की पार्टी के लोग दिल्ली की जनता को गुमराह करने के लिए कमिश्नर को हटाने की मांग कर रहे थे.”

उन्होंने आगे कहा कि Government को तुरंत 56जे के तहत कमिश्नर डीसी को नौकरी से निकालना चाहिए ताकि अगली बार कोई भी अधिकारी, नेताओं या किसी बिल्डर के दबाव में आकर इतनी बड़ी दुर्घटना को न होने दे. दूसरी चीज, जब कांग्रेस की 1984 में देश में Government थी, 1985 में तत्कालीन Government दिल्ली के लिए सेक्शन 466ए के तहत एक बहुत बड़ा कानून लेकर आई थी. इसके अंदर कोई भी व्यक्ति जो दिल्ली में गैरकानूनी कंस्ट्रक्शन करता था, उसके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने और जेल भेजने का प्रावधान था.

कांग्रेस नेता ने कहा कि अभी जो जनविश्वास बिल, केंद्र Government लेकर आई है, उसमें से सेक्शन 466 ए को हटा दिया है, यानी कि उन लोगों पर कोई भी आपराधिक मामला नहीं बन सकता. इस Government ने बिल्डरों को संरक्षण देने के लिए इतना बड़ा कदम उठाया. इतनी ही कोशिश, अगर ये दिल्ली की बिल्डिंग्स को बचाने में करते, तो इस तरीके से हादसे दिल्ली में नहीं होते. सरकारी आंकड़ा कहता है कि दिल्ली में इस समय मात्र 19 बिल्डिंग ही खतरनाक हैं. यानी कि अधिकारियों पर बिल्डर्स, नेताओं और इन्हीं के विभाग के लोगों का दबाव है, ताकि ये खतरनाक बिल्डिंग को चिन्हित ना करें. तुरंत दिल्ली के अंदर डोर टू डोर सर्वे होना चाहिए, जितनी भी खतरनाक बिल्डिंग्स हैं, उनकी सूची को नगर निगम की वेबसाइट में डालना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति जो दिल्ली में आकर इन घरों को किराए पर लेना चाहता है, वो जाकर देख सकता है कि ये बिल्डिंग खतरनाक है या नहीं.

उन्होंने आगे कहा कि जितनी भी चिन्हित बिल्डिंग खतरनाक हैं, उनके बिजली-पानी के कनेक्शन तब तक के लिए काट दें, जब तक वो उसे ठीक ना करा दें. जबतक हमारा टेक्निकल सर्वेयर हरी झंडी नहीं दिखाता, तब तक वहां लोगों को रहने की अनुमति नहीं देनी चाहिए. ये समस्या केवल हॉस्टल तक नहीं है, दिल्ली की ट्रांसपोर्टेशन को लेकर भी है. जब मैं दिल्ली में छात्रों से बात करता हूं, वो ये कहते हैं कि दिल्ली में बसें भी नहीं हैं. अगर हम कहीं और जाकर भी रहें, तो आने की परिवहन व्यवस्था हमारे यहां नहीं है. दिल्ली मेट्रो बहुत ज्यादा महंगी है, तो स्टूडेंट्स कॉलेजों के आसपास घर देखते हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी में हॉस्टल बनाने का वादा स्वयं भारतीय जनता पार्टी का था, उन्होंने हॉस्टल नहीं बनाए.

एबीएम