
New Delhi, 6 सितंबर . दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली की पुरानी इमारतों में रिहायशी और व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं. दिल्ली फायर सर्विस (डीएफएस) के पूर्व निदेशक अतुल गर्ग ने कहा कि कई इमारतें मूल रूप से रहने के लिए बनाई गई थीं, लेकिन बाद में उनका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए होने लगा. इससे इमारतों पर अतिरिक्त भार बढ़ जाता है और उनकी संरचनात्मक मजबूती प्रभावित हो सकती है.
से बातचीत में पूर्व डीएफएस निदेशक अतुल गर्ग ने बताया कि सत्य निकेतन की घटना से पहले साकेत के सैदुलजाब इलाके में भी एक इमारत गिरने की घटना हुई थी. इसके अलावा पालम विहार में आग लगने की घटना हुई.
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से जुड़ी इमारतों की प्रकृति में कुछ समानताएं हैं. ये सभी इमारतें मूल रूप से रिहायशी मकसद से बनाई गई थीं. बाद में इनका इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए होने लगा. इनके बिल्डिंग प्लान या तो तैयार नहीं किए गए या उन्हें मंजूरी नहीं मिली और न ही इनकी स्ट्रक्चरल मजबूती की पर्याप्त जांच की गई. सत्य निकेतन में भी कई इमारतें पहले घर के तौर पर बनाई गई थीं, बाद में इनका व्यावसायिक इस्तेमाल होने लगा.
उन्होंने कहा कि जब किसी रिहायशी इमारत में कोचिंग सेंटर या पीजी संचालित होने लगता है, तो वहां रहने या आने-जाने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ जाती है. इससे इमारत पर अतिरिक्त भार पड़ता है. यदि पहले से ही किसी इमारत की संरचनात्मक मजबूती कमजोर है और बाद में उसमें अतिरिक्त निर्माण या व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो जाएं, तो जोखिम बढ़ जाता है.
उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग ऐसी पुरानी इमारतों में रहते हैं और कई जगह भवनों के नक्शे और निर्माण की स्थिति को लेकर भी सवाल हैं. ऐसे में नियमित जांच और ऑडिट की जरूरत है.
सत्य निकेतन में पीजी संचालन से जुड़े सवाल पर अतुल गर्ग ने कहा कि इस तरह की इमारतों में नियमों और जिम्मेदारियों को लेकर अभी भी अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है. पीजी चलाने के लिए इस इमारत को दिल्ली फायर सर्विस से एनओसी की जरूरत नहीं थी. दूसरी बात यह है कि ये इमारतें ऐसे इलाकों में बनी थीं, जो मूल रूप से रिहायशी इलाके थे और उनका इस्तेमाल गैरकानूनी तरीके से हो रहा था. ऐसे मामलों में निर्माण पर दिल्ली फायर सर्विस का कोई नियंत्रण नहीं होता. इसमें मुख्य भूमिका बिल्डिंग अथॉरिटी की होती है.
पीजी के लिए आवश्यक नियमों के बारे में उन्होंने कहा कि 15 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों के लिए नियम निर्धारित हैं, जबकि 15 मीटर से कम ऊंचाई वाली इमारतों के मामले में फायर ब्रिगेड की मंजूरी का प्रावधान अलग है.
उन्होंने प्रशासन से सत्य निकेतन इलाके की सभी पुरानी इमारतों का ऑडिट कराने की मांग की. जिन रिहायशी इमारतों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, उनका अनिवार्य रूप से ऑडिट कराया जाना चाहिए. ऑडिट के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि किसी इमारत का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए सुरक्षित रूप से किया जा सकता है. छात्रों और अन्य लोगों को भी जागरूक करने की जरूरत है कि वे ऐसे पीजी में रहने से बचें, जहां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि हमें छात्रों को भी आगाह करना होगा कि वे ऐसे पीजी में न रहें जहां मानकों का उल्लंघन हो रहा है. दिल्ली पुरानी इमारतों का सर्वे कराया जाना चाहिए.
अतुल गर्ग ने विश्वास जताते हुए कहा कि मालवीय नगर की घटना के बाद सर्वे चल रहा है और धीरे-धीरे इसमें सफलता मिलने की उम्मीद है.
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डीकेएम/
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