
New Delhi, 28 अक्टूबर . पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-Political तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में Wednesday को तेज उछाल देखने को मिला. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक को मिसाइल से निशाना बनाया, जिसके बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं फिर बढ़ गईं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्रूड ऑयल महंगा हो गया.
ब्रेंट क्रूड के दिसंबर वायदा अनुबंध में 1.55 डॉलर यानी 1.36 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 115.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 1.43 प्रतिशत बढ़कर 101.32 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया.
हूती समूह ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब की तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया है. हालांकि सऊदी अधिकारियों ने लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली इस रिफाइनरी पर हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. इसके बावजूद बाजार में संभावित आपूर्ति व्यवधान की आशंका बढ़ गई, जिससे तेल कीमतों में तेजी लौट आई.
यह बढ़त ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 2 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट दर्ज की गई थी. मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रयासों और क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते बाजार में राहत का माहौल बना था. साथ ही अमेरिकी कच्चे तेल भंडार में वृद्धि की संभावनाओं ने भी उस समय कीमतों पर दबाव डाला था.
हाल ही में तेहरान में सऊदी अरब, तुर्किये, Pakistan और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच क्षेत्रीय तनाव कम करने को लेकर बैठक हुई थी. रिपोर्टों के अनुसार, सभी पक्षों ने शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद जारी रखने पर सहमति जताई है.
इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि Sunday को होने वाली ओपेक+ की बैठक में दिसंबर के उत्पादन लक्ष्यों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. संगठन के प्रमुख उत्पादक देशों, जिनमें सऊदी अरब, रूस और इराक शामिल हैं, का उत्पादन अभी भी निर्धारित लक्ष्यों से नीचे चल रहा है.
सऊदी अरब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक और सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है. ऐसे में वहां किसी भी तरह की आपूर्ति संबंधी चिंता का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ता है.
विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बना हुआ है. यह विश्व ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से संघर्ष शुरू होने से पहले वैश्विक ऊर्जा शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता था.
ऊर्जा बाजार पहले से ही सतर्क बने हुए थे, क्योंकि पिछले सप्ताह ईरान द्वारा जलडमरूमध्य के आसपास तेल टैंकरों पर किए गए हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था, जो अप्रैल के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था. Monday को भी ब्रेंट ने कुछ समय के लिए 117 डॉलर का स्तर छुआ था.
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, डब्ल्यूटीआई क्रूड ने Tuesday को 99 से 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण समर्थन स्तर पर मजबूती दिखाई, जिसके बाद खरीदारी बढ़ी. फिलहाल 103 से 104 डॉलर का स्तर निकटतम प्रतिरोध माना जा रहा है. इसके ऊपर 106 से 107 डॉलर और फिर 108 डॉलर के स्तर महत्वपूर्ण रहेंगे. दूसरी ओर 99 से 100 डॉलर का स्तर प्रमुख समर्थन बना हुआ है, जबकि इसके नीचे 96 से 97 डॉलर अगला महत्वपूर्ण आधार क्षेत्र होगा.
विशेषज्ञों का कहना है कि निकट अवधि में तेल बाजार की दिशा कूटनीतिक प्रयासों और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी. यदि भू-Political तनाव बढ़ता है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि क्षेत्रीय स्थिति में सुधार होने पर बाजार को कुछ राहत मिल सकती है.
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डीबीपी
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