संविधान और संघ की विचारधारा के बीच जारी है लड़ाई: राहुल गांधी

New Delhi, 29 अगस्त . कांग्रेस नेता और Lok Sabha में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने Saturday को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की भाजपा Government और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधा है. उन्होंने देश में दलितों के साथ कथित भेदभाव और अत्याचार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि India में आज भी दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई चल रही है. एक तरफ संविधान है, जबकि दूसरी तरफ भाजपा और आरएसएस की विचारधारा है.

राहुल गांधी ने कहा कि India का संविधान डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल की विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है. देश में मौजूदा Political संघर्ष को इसी वैचारिक टकराव के रूप में देखा जाना चाहिए.

उन्होंने दलितों के साथ भेदभाव के उदाहरण गिनाते हुए कहा कि संविधान ने छुआछूत और भेदभाव को गैरकानूनी घोषित कर दिया है, लेकिन समाज के कई हिस्सों में ऐसी घटनाएं अब भी देखने को मिलती हैं.

राहुल गांधी ने कहा कि कुछ स्कूलों में दलित बच्चों से टॉयलेट साफ करवाए जाते हैं और उनसे झाड़ू-पोछा कराया जाता है. ऐसी घटनाओं का बच्चों के मानसिक विकास और आने वाली पीढ़ियों की सोच पर गंभीर असर पड़ता है.

राहुल गांधी ने गांवों में पानी के स्रोतों के इस्तेमाल को लेकर भी भेदभाव का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कई जगहों पर दलितों को सार्वजनिक कुओं से पानी लेने की अनुमति नहीं दी जाती और उन्हें अलग व्यवस्था करने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

उन्होंने चाय की दुकानों पर कथित तौर पर अलग-अलग कप रखे जाने का भी जिक्र किया. उनके मुताबिक, कुछ स्थानों पर दलितों के लिए ऐसे कप इस्तेमाल किए जाते हैं जिन्हें इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता है, जबकि अन्य लोगों को कांच के कप दिए जाते हैं.

कांग्रेस नेता ने शादी और बारात के दौरान दलितों के घोड़े पर चढ़ने को लेकर होने वाली कथित हिंसा का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि आज भी कई जगहों पर दलित दूल्हों को घोड़े पर बैठने से रोका जाता है और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती है. राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल किसी एक इलाके की समस्या नहीं है, बल्कि उत्तर India के शहरों और गांवों में ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं.

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा दलितों को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहती. उन्होंने कहा कि दलित व्यक्ति जितना अधिक सफल होता है, उसके खिलाफ उतना ही बड़ा हमला किया जाता है. हालांकि, उनके इन Political आरोपों पर भाजपा की प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध नहीं है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने Rajasthan और उत्तराखंड से जुड़े कथित ‘शुद्धिकरण’ के मामलों का भी उल्लेख किया. उन्होंने आरोप लगाया कि Rajasthan में कांग्रेस विधायक दल के नेता के मंदिर जाने के बाद भाजपा नेताओं की ओर से ‘शुद्धिकरण’ की रस्म की गई. उन्होंने इसे छुआछूत का ही एक रूप बताते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां संविधान के खिलाफ हैं.

राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े हल्द्वानी के रामलीला मैदान के एक मामले का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि खड़गे के वहां भाषण देने के बाद भी ‘शुद्धिकरण’ की रस्म की गई. राहुल गांधी ने कहा कि खड़गे ने अपना पूरा जीवन देश और संविधान को समर्पित किया है और उनके साथ इस तरह का व्यवहार गंभीर मामला है.

उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के मंदिर जाने के बाद परिसर का ‘शुद्धिकरण’ किया जाता है, तो इसका अर्थ यही है कि उस व्यक्ति को अशुद्ध माना जा रहा है. राहुल गांधी ने इसे छुआछूत बताते हुए कहा कि भारतीय संविधान में छुआछूत को अपराध घोषित किया गया है.

राहुल गांधी ने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे 8 अगस्त को मंदिर गए थे, 10 अगस्त को कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ किया गया और 13 अगस्त को खड़गे ने इसे अपराध बताया. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के एक भाजपा नेता ने कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ को सही ठहराया था. राहुल गांधी ने इस मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की.

उन्होंने कहा कि घटना को करीब 20 दिन बीत चुके हैं और जिन लोगों ने कथित तौर पर यह कृत्य किया, उनके खिलाफ जल्द से जल्द First Information Report दर्ज होनी चाहिए. राहुल गांधी ने बिहार के Chief Minister जीतन राम मांझी के मंदिर जाने के दौरान कथित भेदभाव का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे मामलों को सामान्य घटना नहीं माना जा सकता.

राहुल गांधी ने कहा कि दलितों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा केवल अतीत की समस्या नहीं है. संविधान ने भले ही छुआछूत और भेदभाव को कानूनी रूप से खत्म किया हो, लेकिन सामाजिक स्तर पर इसके अवशेष अब भी मौजूद हैं. देश की राजनीति में संविधान और उनकी विचारधारा के बीच संघर्ष जारी है.

एएस