
Mumbai , 21 अक्टूबर . शिवसेना-यूबीटी के सांसद संजय राउत ने Wednesday को Maharashtra के Chief Minister देवेंद्र फडणवीस को लिखे एक पत्र में ठाणे में चल रही डेटा सेंटर परियोजना पर तुरंत रोक लगाने की मांग की.
स्थानीय बुनियादी ढांचे के लिए गंभीर जोखिमों, संसाधनों की भारी खपत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का हवाला देते हुए, राउत ने राज्य Government से आग्रह किया कि जब तक राज्य-स्तरीय व्यापक नीति नहीं बन जाती, तब तक इस परियोजना को रोक दिया जाए.
शिवसेना-यूबीटी नेता ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही पूरे राज्य में तकनीकी बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन यह स्थानीय निवासियों की बुनियादी नागरिक सुविधाओं और पारिस्थितिक संतुलन की कीमत पर नहीं होना चाहिए.
उन्होंने Chief Minister फडणवीस से आग्रह किया कि वे ठाणे नगर निगम (टीएमसी), Maharashtra प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी), बिजली वितरण कंपनियों, जल आपूर्ति प्राधिकरणों और परियोजना डेवलपर्स के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त परामर्श बैठक आयोजित करें.
उन्होंने यह भी मांग की कि सभी नियामक मंजूरियों, जिनमें निर्माण की अनुमति, पानी की आपूर्ति का आवंटन, बिजली लोड की मंजूरी, पेड़ काटने की अनुमति और पर्यावरणीय मंजूरी शामिल हैं, को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाए.
शिवसेना-यूबीटी नेता ने कहा कि वर्तमान में सक्रिय और समाप्त हो चुकी अनुमतियों की कानूनी वैधता भी स्पष्ट की जानी चाहिए.
राउत ने यह भी अपील की कि इस सुविधा (प्रोजेक्ट) में प्रतिदिन और पीक समय में होने वाली पानी की खपत, पानी के स्रोतों, रीसाइक्लिंग क्षमताओं और कूलिंग तकनीकों का स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन कराया जाए.
उन्होंने डेवलपर के ‘वाटर-फ्री कूलिंग’ के दावों के दायरे और उनकी वैधता पर स्पष्टता की मांग की.
राउत ने बिजली की पीक मांग, बिजली आपूर्ति की विशेष व्यवस्था और स्थानीय ग्रिड पर पड़ने वाले संभावित लोड के बारे में स्पष्ट विवरण प्रकाशित करने का भी आग्रह किया.
उन्होंने कहा कि राज्य Government को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आवश्यक बिजली बुनियादी ढांचे के निर्माण का खर्च कौन उठाएगा.
प्रदूषण और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को नियंत्रित करने के संबंध में, राउत ने मांग की कि आस-पास की आवासीय इमारतों पर शोर और वायु प्रदूषण के संभावित प्रभावों का आकलन किया जाए. साथ ही, बैकअप डीजल जनरेटर, कूलिंग सिस्टम और चल रहे निर्माण कार्यों के लिए कड़े नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए.
उन्होंने निवासियों की चिंताओं को सीधे सुनने के लिए एक खुली सार्वजनिक सुनवाई आयोजित करने की पुरजोर वकालत की.
राउत ने मांग की, “बैठकों का आधिकारिक विवरण, डेवलपर्स द्वारा किए गए वादे और नियमों को लागू करने की समय-सीमा सार्वजनिक की जानी चाहिए. यदि अनुमति की शर्तों का उल्लंघन पाया जाता है, तो तुरंत नियामक प्रतिबंध लगाए जाएं और काम रोक दिया जाए; काम को तभी फिर से शुरू करने की अनुमति दी जाए, जब सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा लिए जाएं.”
उन्होंने राज्य Government से मांग की है कि वह पूरे Maharashtra में डेटा सेंटरों के लिए स्पष्ट नीतिगत दिशानिर्देश तैयार करे. इन दिशानिर्देशों में पानी की खपत, बिजली के इस्तेमाल, उत्सर्जन, शोर और स्थानीय समुदाय पर पड़ने वाले प्रभावों को शामिल किया जाना चाहिए.
उन्होंने इस बात पर विचार करने की जरूरत जताई है कि क्या घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में इतनी अधिक ऊर्जा की खपत करने वाले डेटा सेंटर स्थापित करना अभी जरूरी है. साथ ही, उन्होंने फिलहाल ठाणे परियोजना पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की है.
परियोजना पर रोक लगाने की इस मांग को लेकर Chief Minister कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.
राउत की ओर से ठाणे डेटा सेंटर पर रोक लगाने की यह मांग ऐसे समय में आई है, जब Mumbai मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में डेटा सेंटर हब विकसित किए जा रहे हैं. इसे लेकर स्थानीय नागरिक कार्यकर्ताओं और निवासियों ने बिजली की अस्थिरता, पानी की आपूर्ति में बदलाव और उपनगरीय इलाकों में ‘हीट आइलैंड’ (स्थानीय स्तर पर तापमान बढ़ने) के प्रभावों को लेकर चिंता जताई है.
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एससीएच
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