
Mumbai , 10 अक्टूबर . शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर विरोध-प्रदर्शन के जरिए देश में अव्यवस्था बढ़ाने का आरोप लगाया है. उन्होंने वोट चोरी के आरोपों को राहुल गांधी का कथित फर्जी नैरेटिव बताते हुए चुनाव आयोग की आलोचना पर सवाल उठाए. साथ ही, दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ Police की कार्रवाई, मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द किए जाने के फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि ये कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए थे, न कि देश में आपातकाल लगाने के लिए.
संजय निरुपम ने कहा कि राहुल गांधी वोट चोरी के मुद्दे पर कथित तौर पर गलत नैरेटिव चला रहे हैं और एसआईआर जैसी संवैधानिक एवं वैधानिक प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए दिल्ली की सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है. दिल्ली Police द्वारा दो बार हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी President द्रौपदी मुर्मु से मिलने पहुंचे. President ने उन्हें समय दिया, यह उनकी उदारता है.
हालांकि, निरुपम ने राहुल गांधी के उस कथित दावे की आलोचना की, जिसमें President को वोट चोरी के आरोपों से सहमत बताया गया. उन्होंने कहा कि President का पद राजनीति से ऊपर है और किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के नाम पर अपनी Political बातों को सही ठहराना उचित नहीं है.
अरविंद केजरीवाल के विरोध प्रदर्शन पर निरुपम ने कहा कि उन्हें आम आदमी पार्टी के संयोजक के रुख से कोई आश्चर्य नहीं है. उन्होंने केजरीवाल के पुराने भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस समय किए गए वादों और बाद की Political गतिविधियों में अंतर रहा है. निरुपम ने केजरीवाल पर कथित अराजक गतिविधियों का समर्थन करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि आम आदमी पार्टी की Political विश्वसनीयता कमजोर होने के कारण केजरीवाल दूसरी Political ताकतों के जरिए अपनी गतिविधियां आगे बढ़ाना चाहते हैं. उन्होंने एक नए Political समूह के आंदोलन को केजरीवाल के समर्थन से जोड़ते हुए इसे उनकी Political रणनीति बताया.
संजय निरुपम ने आगे कहा कि भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है. कोई भी व्यक्ति Government से असहमत हो सकता है और अपनी असहमति व्यक्त कर सकता है. हालांकि, उनके अनुसार, इस अधिकार का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने नीट के मुद्दे पर हुए प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जंतर-मंतर और आसपास के महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों के निकट प्रदर्शन के दौरान अव्यवस्था, मारपीट और तोड़फोड़ हुई थी. इन घटनाओं को देखते हुए दिल्ली Police ने संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्ती बरती और प्रदर्शन से जुड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की.
दिल्ली में कई मेट्रो स्टेशन को बंद किए जाने के फैसले पर निरुपम ने कहा कि मेट्रो आम लोगों की सुविधा के लिए है, लेकिन किसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का इस्तेमाल अव्यवस्था फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए. उन्होंने दिल्ली में कुछ मेट्रो स्टेशन अस्थायी रूप से बंद किए जाने और दिल्ली की ओर आने वाली कुछ ट्रेनों को रद्द करने के फैसले को एहतियाती कदम बताया. उन्होंने कहा कि इन फैसलों का उद्देश्य विभिन्न राज्यों से दिल्ली पहुंचने की तैयारी कर रहे प्रदर्शनकारियों के कारण संभावित अव्यवस्था को रोकना और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना था.
वहीं, मौजूदा स्थिति की इमरजेंसी से तुलना को खारिज करते हुए निरुपम ने कहा कि मौजूदा स्थिति को आपातकाल कहना उचित नहीं है. Police और प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था की है. Government और Police की कार्रवाई को आपातकाल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए. लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने चाहिए और उनसे आम लोगों की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए.
–
Skip to content