
उज्जैन, 6 नवंबर . धनतेरस के पावन अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई. इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए. बीते दिन एकादशी पर संध्या आरती में फूलझड़ी जलाकर बाबा की आरती की गई. इस आरती के साथ ही श्री महाकालेश्वर मंदिर में परंपरागत तरीके से दीपोत्सव की शुरुआत हो गई है.
Friday तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए. दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दर्शन हुए.
इसके बाद पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष से गूंज उठा. मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा. महाकाल मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया.
बाबा महाकाल की पूजा के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया. कपूर की आरती के बाद बाबा महाकाल ने मुकुट धारण किया. इसके बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती की गई.
भांग से बाबा महाकाल को भव्य तरीके से सजाया गया. इसके बाद बाबा को भस्म रमाई गई. बाबा के इस स्वरूप का भक्तों को दर्शन होते ही जय श्री महाकाल के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गूंज पड़ा. झांझ-मंजीरे और डमरू की ध्वनि से बाबा की आरती की गई. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए. अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु कतारबद्ध थे.
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की जाती है. मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं. बाबा महाकाल की इस अद्भुत आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं और दर्शन कर खुद को धन्य महसूस करते हैं.
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एसडी/एएस
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