
Lucknow, 13 अक्टूबर . भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी और दीपोत्सव का उल्लास अब सरयू के तट तक सीमित नहीं है. रामकथा की गूंज रूस की राजधानी मास्को में भी सुनाई देने की तैयारी है. अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारियों के बीच मास्को में भी रामलीला के मंचन की तैयारी शुरू हो गई है. रूस के 16 कलाकार रामायण के पात्रों को मंच पर जीवंत करने के लिए जुट गए हैं.
इस आयोजन की खास बात यह है कि रामायण के पात्रों की वेशभूषा के लिए दिल्ली के चांदनी चौक से वस्त्र खरीदकर रूस ले जाए गए हैं. भारतीय परंपरा, रामकथा और रूसी कलाकारों की भागीदारी का यह मेल अयोध्या के सांस्कृतिक वैभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ा रहा है. उत्तर प्रदेश में Chief Minister योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या के दीपोत्सव और रामलीला से जुड़े आयोजनों को लेकर दुनिया भर में चर्चा होती रही है.
मास्को में आयोजित होने वाली रामलीला के निर्माता एवं निर्देशक डॉ. रामेश्वर सिंह ने बताया कि योगी आदित्यनाथ के Chief Minister बनने के बाद रामलीला का वैभव अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहुत बढ़ा है. रूसी कलाकारों की रामलीला के मंचन से India और रूस के संबंधों को मजबूती मिलती है. इस दृष्टि से मास्को में होने वाली रामलीला केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि दो देशों के बीच परंपराओं और कलात्मक अभिव्यक्ति के आदान-प्रदान का अवसर भी है.
रूसी कलाकारों और अयोध्या के बीच रामलीला के माध्यम से सांस्कृतिक जुड़ाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी नवंबर 2018 में जुड़ी. उस समय अयोध्या में रूस की ‘दिशा रामलीला’ की पहली प्रस्तुति हुई. यह आयोजन रूसी कलाकारों के रामायण से जुड़े मंचन और अयोध्या के सांस्कृतिक वातावरण के बीच संपर्क का अहम पड़ाव बना. भगवान श्रीराम की कथा को दूसरे देश के कलाकारों द्वारा मंच पर प्रस्तुत किया जाना इस सांस्कृतिक यात्रा की विशिष्टता रही. इसके बाद जनवरी 2019 में ‘दिशा रामलीला’ को प्रयागराज कुंभ मेले के मंच पर प्रस्तुत किया गया. कुंभ जैसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में रूसी कलाकारों की भागीदारी ने इस यात्रा को एक और महत्वपूर्ण आयाम दिया.
रामलीला के माध्यम से भारतीय धार्मिक परंपराओं और रंगमंचीय अभिव्यक्ति के बीच संवाद का अवसर बना. अयोध्या में दीपोत्सव समारोहों के साथ ‘दिशा रामलीला’ की प्रस्तुतियों का सिलसिला भी जुड़ा रहा. दीपोत्सव भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी जो लेकर आयोजित होने वाला प्रमुख उत्सव है. इस अवसर पर रूसी कलाकारों की भागीदारी ने India और रूस के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने का अवसर दिया. रामलीला की विशेषता यह है कि इसकी कथा भारतीय समाज और परंपरा में गहरे रूप से जुड़ी हुई है, लेकिन इसके मंचन की संभावनाएं भौगोलिक सीमाओं तक बंधी नहीं हैं.
जब दूसरे देश के कलाकार रामायण के पात्रों को मंच पर प्रस्तुत करते हैं, तो उन्हें भारतीय साहित्य, परंपरा और रंगमंच की अभिव्यक्ति से जुड़ने का अवसर मिलता है. मास्को में 16 रूसी कलाकारों की टीम की तैयारी इसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान की एक कड़ी है. डॉ. रामेश्वर सिंह के अनुसार इस तरह के मंचन दोनों देशों के संबंधों को मजबूती देते हैं.
श्रीराम की कथा से जुड़े इस आयोजन में अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान और रूसी कलाकारों की भागीदारी एक साथ दिखाई देती है. इस तरह रामलीला का मंचन केवल कथा की प्रस्तुति नहीं, बल्कि अलग-अलग संस्कृतियों के बीच संवाद का माध्यम भी बन रहा है. दिशा रामलीला महान रंगकर्मी गेन्नादी मिखाइलोविच पेचनिकोव की विरासत को भी आगे बढ़ाती है, जिन्हें स्नेहपूर्वक ‘रूसी राम’ कहा जाता था.
रूसी दर्शकों के बीच रामलीला को लोकप्रिय बनाने में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है. रामलीला के किरदार 1) राम – अलेक्सी 2) सीता – दाशा 3) लक्ष्मण – ओलेग 4) हनुमान – दमित्री 5) भरत -एवजेनी 6) रावण – सर्गेई 7) दशरथ – आरतियों 8) कौशल्या – रति 9) सुमित्रा- नतातालया 10) कैकेई – इरीना 11) जनक- वसीली 12) सोने का हिरान – रीता 13) मिशा 14) नादेजदा 15) राक्षस सेना 16) वानर सेना .
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