
श्रीनगर, 8 सितंबर . नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के संस्थापक और ‘शेर-ए-कश्मीर’ के नाम से मशहूर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की 44वीं पुण्यतिथि पर Tuesday को उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और जम्मू-कश्मीर के Chief Minister उमर अब्दुल्ला ने हजरतबल स्थित नसीमबाग में उनकी मजार पर पहुंचकर पुष्प अर्पित किए.
इस दौरान शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की याद में विशेष दुआ और नमाज भी अदा की गई. उन्हें जम्मू-कश्मीर के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान के लिए याद किया गया. खास तौर पर लैंड टू द टिलर एक्ट जैसे फैसलों का उल्लेख किया गया, जिन्हें किसानों और आम लोगों के हित में महत्वपूर्ण माना जाता है.
एनसी ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज आठ सितंबर को हम बाबा-ए-कौम, शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की 44वीं पुण्यतिथि मना रहे हैं. उनका जीवन जम्मू-कश्मीर के लोगों की गरिमा, अधिकारों और आकांक्षाओं के लिए समर्पित था. हम उनके नेतृत्व को याद करते हैं, उनकी विरासत का सम्मान करते हैं और उस महान शख्सियत को श्रद्धांजलि देते हैं, जो आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है.’’
Chief Minister के सलाहकार नासिर असलम वानी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “यहां पहली बार इतने बड़े स्तर पर फिल्म फेस्टिवल का आयोजन हो रहा है. इसमें नामी-गिरामी कलाकार शामिल हो रहे हैं. उनकी फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी. इससे टूरिज़्म और ट्रेड कॉमर्स के हवाले से काफी फायदा होगा. ऐसे आयोजन हमारे लिए बहुत जरूरी हैं.”
नासिर असलम वानी ने आगे कहा, “उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. उनका इस कौम पर एक एहसान है. जब यह कौम पराजय की स्थिति में थी तब उन्होंने अकेले निकलकर एक आवाज़ बुलंद की. कौम को निजात दिलाई. यहां के लोगों को बिना किसी मुआवज़े के जमीन का हकदार बनाया. शिक्षा के निज़ाम की शुरुआत की.”
बता दें कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा के 90 सदस्यों में आरामदायक बहुमत होने के बावजूद, सत्तारूढ़ नेशनल कांग्रेस आज उस अपार लोकप्रियता की एक धुंधली छाया मात्र है जो पार्टी को इसके संस्थापक शेख अब्दुल्ला के जीवनकाल में प्राप्त थी. जब 8 सितंबर 1982 को शेख का निधन हुआ, तो लगभग दस लाख कश्मीरियों की एक शोकग्रस्त और विलाप करती भीड़ उनके अंतिम संस्कार जुलूस में शामिल हुई.
तत्कालीन President ज्ञानी जैल सिंह और तत्कालीन Prime Minister इंदिरा गांधी दिवंगत शेख को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए New Delhi से आए थे. उनकी मृत्यु के 44 साल बाद और सबसे भीषण आतंकवादी हिंसा के 35 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, कश्मीर शाब्दिक और लाक्षणिक दोनों अर्थों में दिवंगत शेख से अधिक महान नेता पैदा करने में सक्षम नहीं रहा है.
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पीएम
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