
New Delhi, 28 अक्टूबर . India के समुद्री और जहाज निर्माण क्षेत्र में निवेश तथा तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए साइप्रस की लगभग 25 प्रमुख कंपनियां नवंबर में India का दौरा करेंगी. इन कंपनियों के प्रतिनिधि शिपिंग, शिप मैनेजमेंट, समुद्री प्रौद्योगिकी और उससे जुड़े क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाओं का आकलन करेंगे. यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में दी गई.
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया के बुसान में दक्षिण कोरियाई समुद्री संस्थानों, जहाज निर्माण कंपनियों और साइप्रस के शिपिंग उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं. इन चर्चाओं का मुख्य फोकस India की बढ़ती जहाज निर्माण महत्वाकांक्षाओं के लिए आवश्यक सप्लाई चेन, वित्त, प्रौद्योगिकी और बाजारों को मजबूत करना था.
बैठकों के दौरान जहाज निर्माण निवेश, समुद्री उपकरण विनिर्माण, समुद्री वित्तपोषण, बंदरगाह विकास, शिपिंग, हरित प्रौद्योगिकी और टिकाऊ जहाज पुनर्चक्रण (शिप रीसाइक्लिंग) जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. साइप्रस ने भारतीय शिप रीसाइक्लिंग यार्डों को यूरोपीय संघ से मान्यता दिलाने के India के प्रयासों का भी समर्थन किया.
India और दक्षिण कोरिया के बीच एलपीजी तथा एलएनजी कार्गो टैंक, क्रायोजेनिक संरचनाओं और बड़े जहाज ब्लॉक्स के निर्माण में साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई. सोनोवाल ने दक्षिण कोरियाई समुद्री वित्तीय संस्थानों के सामने मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (एमडीएफ) और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन (एसएमएफसी) से जुड़े अवसरों को भी प्रस्तुत किया.
सरकारी बयान के अनुसार, दक्षिण कोरिया की एक प्रमुख शिपिंग कंपनी ने India में जहाजों की भारतीय ध्वज के तहत रजिस्ट्री, India में कंटेनर निर्माण और आगामी वधावन पोर्ट परियोजना में निवेश की रुचि दिखाई है.
साइप्रस की शिपिंग उपमंत्री मरीना हाजीमानोलिस के साथ द्विपक्षीय बैठक में शिपिंग, जहाज निर्माण, समुद्री निवेश, नाविकों के कल्याण और समुद्री सेवाओं पर चर्चा हुई. इसी दौरान उन्होंने जानकारी दी कि साइप्रस की 25 अग्रणी कंपनियां नवंबर में India आकर संभावित व्यावसायिक साझेदारियों पर विचार करेंगी.
दोनों देशों ने भारत-साइप्रस रणनीतिक साझेदारी का स्वागत करते हुए इसे व्यावसायिक परिणामों में बदलने पर जोर दिया. सोनोवाल ने कहा, “मैं हमारी रणनीतिक साझेदारी को परस्पर लाभकारी समुद्री सहयोग में बदलने के लिए आपके साथ काम करने को लेकर उत्साहित हूं.”
दक्षिण कोरिया की सेजिन हैवी इंडस्ट्रीज के सीईओ किम जिन-जोंग के साथ बैठक में बड़े जहाज ब्लॉक्स, एलपीजी एवं एलएनजी कार्गो टैंकों, क्रायोजेनिक संरचनाओं और अन्य विशेष समुद्री उपकरणों के निर्माण में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई. भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नए शिपबिल्डिंग क्लस्टरों और मौजूदा शिपयार्डों के विस्तार से मिलने वाले अवसरों का भी उल्लेख किया. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) ने भी सेजिन के साथ ब्लॉक फैब्रिकेशन सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की.
वहीं कोरिया मरीन इक्विपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (केओएमईआरआई) के अध्यक्ष यांग वोन-चांग के साथ बैठक में समुद्री उपकरण निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, परीक्षण, प्रमाणन, ग्रीन प्रोपल्शन और स्मार्ट समुद्री तकनीकों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.
सोनोवाल ने कहा कि India इंडिया शिप टेक्नोलॉजी सेंटर को जहाज डिजाइन, अनुसंधान, परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित कर रहा है. उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की तकनीकी विशेषज्ञता के साथ देश में ही परीक्षण और प्रमाणन सुविधाओं के विकास से भारतीय समुद्री उपकरणों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने और ग्रीन प्रोपल्शन तथा स्मार्ट शिप तकनीकों के लिए तैयार करने में मदद मिलेगी.
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डीबीपी
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