
Patna, 6 सितंबर . बिहार में ‘जेनजी राइजिंग’ कार्यक्रम में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष शामिल हुई. उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की पहचान शिक्षा, रोजगार और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले छात्रों से होनी चाहिए.
Patna में से बातचीत में जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक छात्र एक्टिविस्ट पर कथित हमले के आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के मामले का जिक्र करते हुए नेहा बोरा ने कहा कि देश के सामने दो अलग-अलग मॉडल हैं.
उन्होंने कहा कि दो मॉडल हैं, एक वो है जिसमें नफरत पर आधारित India को बढ़ावा दिया जा रहा है, जहां स्वतंत्र भारद्वाज जैसे लोग इस देश के आम नागरिक की पहचान बन जाएं. हम चाहते हैं कि जंतर-मंतर पर विरोध कर रहे छात्र, गर्दनीबाग में प्रदर्शन कर रहे छात्र, बीपीएससी घोटाले और Police भर्ती घोटाले के खिलाफ आवाज उठा रहे छात्र, तथा शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठाने वाले छात्र इस देश के आम नागरिक की पहचान बनें.
नेहा बोरा ने कहा कि यही उनके और देश के आम लोगों के बीच Political अंतर है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी विचारधारा आम लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, जबकि भाजपा और आरएसएस सत्ता की राजनीति कर रहे हैं.
‘जेनजी राइजिंग’ कार्यक्रम को लेकर नेहा बोरा ने कहा कि इसका मकसद बिहार के उन छात्रों के साथ एकजुटता दिखाना था, जो लंबे समय से अपने अधिकारों और विभिन्न मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. जब वे जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के समर्थन में सड़कों पर उतरे, तो उन पर लाठीचार्ज किया गया. 600 से ज्यादा लोगों को जेल भी भेजा गया. सबसे पहले उन छात्रों का शुक्रिया अदा करना चाहिए, जो इस सामूहिक संघर्ष में उनके साथ खड़े रहे. छात्रों का संघर्ष अभी भी जारी है.
नेहा बोरा ने कहा कि जो छात्र घायल हुए, जिनके सिर में चोटें आईं, जिनके कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा और जिन्हें अब सर्जरी की जरूरत है, उन्हें न्याय कौन दिलाएगा. सम्राट चौधरी Government और बिहार Police, जो इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं, उनकी जवाबदेही अभी तय होनी बाकी है. छात्रों की परीक्षाओं में सामने आ रही गड़बड़ियों से जुड़ी मांगों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा. युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन पर Government से जवाब मांगा जाना चाहिए.
छात्र नेता हबीबा ने कहा कि परीक्षा रद्द होनी चाहिए, लेकिन Government इस पर चुप है और इसे रद्द करने के लिए तैयार नहीं है. इसमें कई गड़बड़ियां हैं. आरोप है कि सीटें बेची जा रही हैं और पेपर लीक के मामले भी सामने आए हैं. ऐसा लगता है कि कोई भी इन समस्याओं से अछूता नहीं है.
हबीबा ने कहा कि पूरे राज्य के लोग और देशभर के युवा ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. उन्होंने Jharkhand Government का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई परीक्षाएं रद्द की गई थीं. बिहार के Chief Minister को हमारे Chief Minister से सीखना चाहिए, जिन्होंने Jharkhand के बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए 22 परीक्षाएं रद्द कर दी थी.
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डीकेएम/
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