शिक्षकों को सातवां वेतनमान और 10 हजार युवाओं को रोजगार दिलाने की जिम्मेदारी जन सुराज की: प्रशांत किशोर

हाजीपुर, 11 अक्टूबर . जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने Sunday को हाजीपुर में आयोजित शिक्षक संवाद कार्यक्रम में कहा कि इस बार बिहार में लोग न ऊपर देखकर और न नीचे देखकर, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य, रोजगार और शिक्षकों की समस्याओं को ध्यान में रखकर मतदान करेंगे. उन्होंने कहा कि जन सुराज ने शिक्षकों को Lok Sabha चुनाव से पहले सातवां वेतनमान दिलाने का संकल्प लिया है.

प्रशांत किशोर ने कहा कि वैशाली जिले के शिक्षक इस बात पर चर्चा के लिए जुटे हैं कि सातवां वेतनमान किस तरह सुनिश्चित कराया जाए. उन्होंने कहा कि इस बार का वोट किसी Government को बनाने या हटाने के लिए नहीं, बल्कि बनी हुई Government को जवाबदेह बनाने के लिए होगा.

उन्होंने कहा, “इस बार का वोट इस बात के लिए है कि यहां के शिक्षकों को सातवां वेतनमान मिले. दशकों से चली आ रही वित्त रहित शिक्षकों की समस्या का समाधान हो और पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिले.” जन सुराज के स्नातक उम्मीदवार इंजीनियर मोहन की जीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि वे चुनाव जीतकर आते हैं तो तिरहुत क्षेत्र के कम से कम 10 हजार पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार निजी क्षेत्र में नौकरी दिलाने की जिम्मेदारी प्रशांत किशोर और जन सुराज की होगी.

उन्होंने कहा कि बांकीपुर में जिस तरह की सुविधा लोगों को उपलब्ध कराई जा रही है, उसी तरह की सुविधा तिरहुत क्षेत्र के स्नातकों को भी मिलनी चाहिए. उन्होंने शिक्षकों से अपने अधिकारों और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करने की अपील की. दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर ‘तिलचट्टा’ कहे जाने को लेकर Union Minister जीतन राम मांझी पर निशाना साधते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके शब्दों के चयन और वक्तव्यों को लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं.

उन्होंने कहा कि शिक्षा, पेपर लीक, बेरोजगारी और चुनाव प्रक्रिया को लेकर समाज में जो असंतोष है, वही सड़कों पर दिखाई दे रहा है. Government आंदोलनों और प्रदर्शनों को दबाकर या रोककर इस असंतोष को खत्म नहीं कर सकती. प्रशांत किशोर ने कहा कि कुछ दिनों के लिए सेना, अर्धसैनिक बल और Police की तैनाती कर लोगों को घर से निकलने से रोका जा सकता है, लेकिन इससे आंदोलन समाप्त नहीं होगा.

उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में Police और अर्धसैनिक बलों की तैनाती खुद आंदोलन की ताकत और Government की चिंता को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि जब तक बच्चों की शिक्षा, बेरोजगारी और चुनाव सुधार जैसे बुनियादी मुद्दों पर Government ठोस और विश्वसनीय कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन और प्रदर्शन जारी रहेंगे.

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एमएनपी/डीकेपी