
New Delhi, 26 अक्टूबर . केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के सहयोग से Monday को राष्ट्रीय राजधानी स्थित सीआईएसएफ मुख्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित किया.
इस कार्यक्रम में 29 सितंबर को सीआईएसएफ यूनिट एसएचईपी सेवा-II में तैनात रहने के दौरान जान गंवाने वाले चार सीआईएसएफ कर्मियों के परिवारों को वित्तीय सहायता और कल्याणकारी लाभ प्रदान करने के लिए चेक सौंपे गए.
इस समारोह में सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन, एडीजी (मुख्यालय) विजय प्रकाश और एडीजी (एयरपोर्ट सेक्टर) बिनीता ठाकुर शामिल हुए.
एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों में एसबीआई के सलाहकार हरिनाथ मिश्रा, महाप्रबंधक (जीएम) अजीत पोद्दार और उप महाप्रबंधक (डीजीएम) सुचित्रा जैन मौजूद थे.
मृतक कर्मियों में असिस्टेंट कमांडेंट/एग्जीक्यूटिव अंकित कुमार पांडे, एसआई/एग्जीक्यूटिव लछमन सिंह, constable/जीडी मो. रफीक और constable/जीडी संजीव कुमार शामिल थे.
प्रत्येक परिवार के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता में पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस (पीएआई) के तहत 1 करोड़ रुपए, ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस (जीटीएलआई) के तहत 10 लाख रुपए, परिजनों के लिए सीआईएसएफ रिस्क फंड से 20 लाख रुपए, माता-पिता के लिए सीआईएसएफ रिस्क फंड से 5 लाख रुपए, अंतिम संस्कार के खर्च के लिए 35,000 रुपए और गृह मंत्रालय (एमएचए) की ओर से अनुग्रह राशि के रूप में 25 लाख रुपए शामिल हैं.
इस वित्तीय सहायता की कुल राशि प्रति परिवार 1.6 करोड़ रुपए है, जिसमें गृह मंत्रालय (एमएचए) से मिलने वाली अनुग्रह राशि भी शामिल है, जो अभी जारी होनी बाकी है. चारों कर्मियों के पेंशन मामलों को प्रोसेसिंग के लिए New Delhi स्थित ‘पे एंड अकाउंट्स ऑफिस’ (पीएओ) में भेज दिया गया है.
समारोह के दौरान सीआईएसएफ और एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने शोक संतप्त परिवारों से बातचीत की और उन्हें सभी देय वित्तीय लाभ जल्द से जल्द दिलाने का भरोसा दिलाया.
सीआईएसएफ ने परिवारों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और वित्तीय तथा पेंशन से जुड़े लंबित मामलों को सुलझाने में हर संभव मदद का आश्वासन दिया. नियमों के अनुसार, पात्र आश्रितों को ‘अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति’ देने पर भी विचार किया जा सकता है.
यह पहल सीआईएसएफ और एसबीआई के बीच बेहतर तालमेल को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य मृतक कर्मियों के परिवारों को बीमा दावों और अन्य कल्याणकारी लाभों को आसानी से उपलब्ध कराना है.
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डीके/डीकेपी
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