शरजील इमाम को चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए मिली अंतरिम जमानत

New Delhi, 22 सितंबर . दिल्ली की एक अदालत ने जेल में बंद छात्र नेता शरजील इमाम को उसके चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दी है. यह अंतरिम जमानत 4 से 10 अक्टूबर तक मिली है.

कड़कड़डूमा कोर्ट ने शरजील इमाम को राहत दी है. इमाम पर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम और अन्य कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है.

उसे यह अंतरिम जमानत इसलिए दी गई ताकि वह तय समय में अपने चचेरे भाई की शादी की रस्मों में शामिल हो सके. इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने शरजील इमाम की उस याचिका पर दिल्ली Police को नोटिस जारी किया था जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट द्वारा रेगुलर जमानत न दिए जाने के फैसले को चुनौती दी थी.

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और विकास महाजन की डिवीजन बेंच ने Police से जवाब मांगा था और मामले की अगली सुनवाई तय की थी.

ट्रायल कोर्ट ने पहले इमाम और सह-आरोपी उमर खालिद की रेगुलर जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं. कोर्ट ने Supreme Court के 5 जनवरी के उस आदेश का हवाला दिया था जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार किया गया था और वे परिस्थितियां बताई गई थीं जिनमें वे अपनी याचिकाएं दोबारा दाखिल कर सकते थे.

इस साल की शुरुआत में, Supreme Court ने इमाम और खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष के सबूतों से प्रथमदृष्टया ऐसे आधार मिलते हैं जिनसे यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत कानूनी रोक लागू होती है जबकि पांच अन्य सह-आरोपियों को जमानत दे दी गई थी.

हाल ही में, Supreme Court ने सह-आरोपी तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को छह महीने की अंतरिम जमानत दी थी. साथ ही, कोर्ट ने एक बड़ी बेंच को यह सवाल भेजा था कि क्या यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत प्रतिबंधों के बावजूद लंबे समय तक जेल में रहने और ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत दी जा सकती है.

दिल्ली Police ने हाईकोर्ट में इमाम और खालिद की जमानत याचिकाओं का विरोध किया है. Police ने उन्हें कथित साजिश का मास्टरमाइंड बताया है और तर्क दिया है कि Supreme Court के 5 जनवरी के आदेश को देखते हुए उनकी नई याचिकाएं विचार करने योग्य नहीं हैं. यह मामला फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे की कथित बड़ी साजिश से जुड़ा है. शरजील इमाम उन कई आरोपियों में शामिल हैं जिन पर यूएपीएऔर अन्य कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

डीकेएम/पीएम