‘शक से लेकर आगे बढ़कर नेतृत्व करने तक, इससे ज्यादा खुशी नहीं हो सकती: नीरू के कोच पीटर विल्सन

“इस दौरान, लोग बाहर होते जा रहे थे. आप 10 के ग्रुप में जाते हैं, फिर 5-5 के ग्रुप में. उस पल में, उन्हें गोल्ड जीतने के लिए बस एक और टारगेट की जरूरत थी. तभी उन्हें ज्यादा समय लेने के लिए येलो कार्ड दे दिया गया, जो मुझे बहुत गलत लगा, क्योंकि उन्होंने टाइमर बहुत जल्दी शुरू कर दिया था. मैंने जूरी के सामने आपत्ति जताई, उन्होंने टाइमर ठीक किया. नीरू कमाल की थीं. वह सबसे ज्यादा शांत थीं. उन्होंने खुद को संभाला और शूट किया.”

विल्सन के लिए, फाइनल से पहले सबसे जरूरी बात यह थी कि ढांडा पर इस मौके की अहमियत का बोझ न डाला जाए, भले ही वह क्वालिफिकेशन में टॉप पर रही थीं. उन्होंने कहा, “बस डटे रहो और एक बार में एक टारगेट पर ध्यान दो. यह सुनने में आसान है, लेकिन करना मुश्किल. बेशक, मन में और भी बातें चलती रहती हैं, लेकिन आपको उन्हें रोकना होता है और ध्यान वापस इसी पल पर लाना होता है. बस वर्तमान में जियो और एक बार में एक टारगेट पर ध्यान दो.”

–

आरएसजी