
Mumbai , 18 अक्टूबर . शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के ‘वोट चोरी’ वाले बयान पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने न तो चुनाव आयोग के सामने और न ही Supreme Court के सामने ‘वोट चोरी’ का एक भी सबूत पेश किया है, सिर्फ हवा में बातें की जा रही हैं. वहीं, दिल्ली में विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों से आम जनजीवन और व्यापार ठप होने का आरोप लगाया. उन्होंने तिरंगा मार्च से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दिपके की हिरासत को कानून के मुताबिक सही ठहराया.
शिवसेना प्रवक्ता राजू वाघमारे ने कहा, “उद्धव ठाकरे को पहले यह बताना होगा कि वोट चुराने और वोट छीनने के अधिकार के बारे में वे जो दावे कर रहे हैं, उसके बारे में विरोधी पार्टी के किसी नेता ने एक भी सबूत पेश नहीं किया है, न तो चुनाव आयोग के सामने और न ही Supreme Court के सामने. अगर उनके पास उस अपराध के लिए कोई सबूत नहीं है, जिसके बारे में वे बात कर रहे हैं, तो सिर्फ हवा में बातें करने से क्या होगा?”
उन्होंने कहा कि जो भी बातें बाहर आई हैं, वो केवल न्यूज आर्टिकल के तहत आई है. उसने आंतरिक दस्तावेज बाहर निकाले, जो उनका आपस का मामला है. हर विभाग में आपस में नोकझोंक होती रहती है. उसके आधार पर Government पर आरोप लगाना बिल्कुल गलत है. उद्धव ठाकरे को इस संबंध में सबूत लेकर आना पड़ेगा, तभी बातचीत होगी.
शिवसेना प्रवक्ता ने कहा कि विरोधी दल को किसी भी मुद्दे पर आंदोलन करने का मौका ही नहीं मिल रहा था. ये मौका मिला तो हर एक विरोधी दल तुमसे बड़ा मैं, ये दिखाने के चक्कर में सभी सड़कों पर उतर रहे हैं. इस वजह से दिल्ली में चक्काजाम की स्थिति है, व्यापारियों को काम करने के लिए नहीं मिल रहा है, जो बीमार हैं, उन्हें अस्पताल जाने में परेशानी हो रही है.
उन्होंने कहा कि इस तरह का आंदोलन अगर हर कोई रोज करना चाहे, तो उससे सार्वजनिक स्थिति में बदलाव जरूर आएगा. जो दिल्ली के व्यापारी कह रहे हैं, वो सही बात है. सवाल व्यापार का नहीं, बल्कि रोज की जिंदगी जीने का है.
वहीं, तिरंगा मार्च से पहले सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके की हिरासत पर राजू वाघमारे ने कहा कि अभिजीत दिपके को तिरंगा रैली से पहले बताया गया था कि जहां वह रैली करना चाहते हैं, वहां कानून के मुताबिक नोटिस देकर रोक लगाई गई है, इसलिए आप वहां रैली नहीं कर सकते.
उन्होंने कहा कि दिपके को यह नोटिस दिए जाने के बाद भी अगर वो वहां जाकर कानून तोड़कर रैली करना चाहते हैं, तो यह कानून के खिलाफ है. इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया और अब उन्हें बेल पर रिहा कर दिया गया है.
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एबीएम
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