वोटर लिस्ट से नाम हटने पर कानूनी उपाय मौजूद, आंदोलन नहीं समाधान : पूर्व जस्टिस पी. एन. रवींद्रन

New Delhi, 8 अक्टूबर . केरल हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस पी. एन. रवींद्रन ने चुनाव आयोग से जुड़े विवाद ‘वोट चोरी’ के आरोपों और संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना पर टिप्पणी की. उन्होंने राहुल गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने की कोशिश, चुनाव आयोग से जुड़े पिछले विवादों और न्यायिक निष्पक्षता से जुड़े सवालों पर भी बात की.

India निर्वाचन आयोग और सीईसी (मुख्य चुनाव आयुक्त) के काम करने के तरीके को लेकर काफी विवाद चल रहा है और क्या चुनाव आयोग पर लगातार हमले करना और उसकी साख पर सवाल उठाना लोकतंत्र के लिए सही है? इसका जवाब देते हुए पूर्व जस्टिस पी. एन. रवींद्रन ने Thursday को समाचार एजेंसी को बताया कि मेरा मानना ​​है कि वे छोटी सी बात का बतंगड़ बना रहे हैं. असल में अभी जो विरोध हो रहा है, वह लोकतंत्र के खिलाफ है. इसमें कुछ हजार लोग शामिल हैं.यह 140 करोड़ भारतीयों का देश है. ज्यादातर लोग शांति पसंद करने वाले हैं. जो लोग सड़कों पर उतरकर लड़ रहे हैं, वे किसी और की तरफ से प्रॉक्सी वॉर लड़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से हुए थे. यह सब उसी प्रक्रिया के बारे में है. एसआईआर प्रक्रिया India के चुनाव आयोग द्वारा कानूनी तौर पर की जाती है और Supreme Court ने इसे सही ठहराया है. यह संवैधानिक रूप से जायज है. अगर एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी वोटर का नाम हटा दिया जाता है, तो उसके पास समाधान का रास्ता होता है. कानून यह है कि वोटर बनने के लिए आपकी उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए. आप एक से ज्यादा चुनाव क्षेत्र में रजिस्टर नहीं हो सकते. आप मानसिक रूप से स्वस्थ होने चाहिए.

यह पूरी प्रक्रिया नाम हटाने की है, ताकि वोटर लिस्ट साफ-सुथरी और सही हो. इसमें उन लोगों के नाम हटाना शामिल है, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे. सिर्फ जिंदा व्यक्ति ही वोटर हो सकते हैं. इसलिए जो लोग गुजर चुके हैं, उनके नाम हटा दिए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसा लोग खुद नहीं करते, इसलिए चुनाव आयोग समय-समय पर यह प्रक्रिया चलाता है और यह नौवां मौका है. इससे पहले आठ बार ऐसा हो चुका है और 2013 में तत्कालीन कानून मंत्री ने Lok Sabha में कहा था कि अगर आप सहमत नहीं हैं, तो आपके पास समाधान का रास्ता है.

पूर्व जस्टिस पी. एन. रवींद्रन ने कहा कि जो लोग सिर्फ चुनाव जीतना चाहते हैं और कुछ नहीं, जो देश के बारे में नहीं सोचते. वे गलत तरीकों का इस्तेमाल करेंगे, चाहे कोई भी Political पार्टी हो. अगर किसी वोटर का नाम एक से ज्यादा जगहों पर हो, तो गलत काम हो सकता है. कोई उस वोटर की जगह वोट डाल सकता है. अब असल में हुआ यह है कि ऐसे लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं. यह सच है कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान ऐसी खबरें आई हैं कि जो असली वोटर हैं, उनके नाम भी हटा दिए गए हैं. उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ा है. मैंने खुद केरल में ऐसी परेशानी का सामना किया है.

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह एक सही वोटर लिस्ट बनाए, जिसके लिए यह काम किया जाता है. असल में हमें सहयोग करना चाहिए. चुनाव आयोग ऐसा इसलिए करता है ताकि हम अपना वोट डाल सकें. वे हमारे लिए एक बड़ा काम कर रहे हैं. चुनाव आयोग के पास यह काम करने के लिए जरूरी स्टाफ नहीं है. इसलिए वे संबंधित राज्य Governmentों के अधिकारियों को चुनावी अधिकारी के तौर पर नियुक्त या नॉमिनेट करते हैं. असल में वही चुनाव करवाते हैं.

चुनाव आयोग इसकी देखरेख करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आयोग के अधिकारी खुद जाकर यह काम करते हैं. वे दौरा कर सकते हैं, देखरेख कर सकते हैं, लेकिन जमीनी स्तर का काम संबंधित राज्य Government के कर्मचारी ही करते हैं. अगर कोई गलती करता है और किसी वोटर का नाम गलत तरीके से हटा देता है, तो इसके लिए समाधान मौजूद है. उसका इस्तेमाल करें.

इसके लिए अदालतों और अधिकारियों के पास जाएं. अगर आपका नाम वोटर लिस्ट से हटा भी दिया गया है, तो आप फिर से वोटर के तौर पर रजिस्टर हो सकते हैं. कानून में इसका प्रावधान है. हालांकि आम आदमी इसे नहीं पढ़ता. उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि जो लोग विरोध कर रहे हैं, उन्होंने कानून पढ़ा है या नहीं या उसे ठीक से समझा है या नहीं. वे बस कोई न कोई बहाना ढूंढकर लड़ाई को सड़कों पर ले जाना चाहते हैं. मैं कहूंगा कि उनकी कोशिश Government को सत्ता से हटाने की है. यह अपने आप में लोकतंत्र विरोधी काम है.

केरल हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस ने कहा कि आप जीतते हैं, आप वोट के जरिए सत्ता में आते हैं. अगले चुनाव में अपनी बात लोगों के सामने रखें. यह सही तरीका नहीं है. यह काम करने का सभ्य तरीका नहीं है. सही तरीका यह है कि किसी वोटर से जुड़े नियम को कानूनी प्रक्रिया के जरिए चुनौती दी जाए. शिकायत दूर करने का सिस्टम मौजूद है. जो Political पार्टियां अभी विरोध कर रही हैं, वे उन वोटरों से मिलकर उन्हें अपील करने या जरूरी प्रक्रिया पूरी करके दोबारा रजिस्ट्रेशन के लिए अर्जी देने के लिए क्यों नहीं मनातीं? वे ऐसा नहीं कर रहे हैं. वे तो बस सड़कों पर हंगामा करना चाहते हैं. वे अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं. वे ऊंचे संवैधानिक पदों पर बैठे सरकारी अधिकारियों को बुरा-भला कहते हैं और Supreme Court ने भी इसकी आलोचना की है.

उन्होंने कहा, “लड़ाई सड़कों पर नहीं लड़ी जाती. इससे कोई नतीजा नहीं निकलेगा. यह बैलेट बॉक्स में, वोटिंग बूथ पर लड़ी जाती है. वहां जाएं, अगर कोई गलती हुई है तो Government की गलतियों के बारे में बताएं, अपने विचार रखें और वोट मांगें.”

पूर्व जस्टिस ने कहा, “इसमें पश्चिमी देशों के हित भी जुड़े हैं. वे India को तरक्की करते हुए नहीं देखना चाहते. इसलिए मैं इन लोगों से यानी तथाकथित आंदोलन चलाने वालों से सम्मानपूर्वक असहमत हूं. विरोध करने का यह तरीका नहीं है. आप लोगों को जागरूक करें, अपने वोटर्स के पास जाएं और उन्हें उनके अधिकारों के बारे में बताएं.

उन्होंने कहा, “मेरा मानना ​​है कि इस आंदोलन को खत्म होना चाहिए. दूसरे लोगों के अधिकारों का क्या? जो लोग शांति पसंद करते हैं. India में ऐसे ही लोगों की संख्या ज्यादा है. जो लोग उन जगहों के आसपास रहते हैं, जहां ये प्रदर्शन हो रहे हैं. उन लोगों के मौलिक अधिकारों का क्या? क्या उन पर असर नहीं पड़ता? मुझे नहीं लगता कि India की जनता इसे स्वीकार करेगी. आने वाले चुनावों में जनता उन्हें बाहर का रास्ता दिखा देगी.

उन्होंने कहा, “मैं आंदोलन कर रहे लोगों से अपील करता हूं कि वे कानूनी रास्ते अपनाएं. आंदोलन न करें, लोगों के साथ बदसलूकी न करें. सरकारी कर्मचारियों के साथ बहुत विनम्रता से पेश आएं.”

वोट चोरी के आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि किसी ने मेरा वोट नहीं चुराया है. केरल में कांग्रेस सत्ता में आई. किसी ने उनके वोट नहीं चुराए. असल में केरल में उन्होंने ‘एसआईआर’ का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि एसआईआर ने हमारी सफलता में योगदान दिया है. आप तमिलनाडु और India के बाकी हिस्सों में भी इसका स्वागत करते हैं. फिर इसे वोट चोरी कहा जाता है, तो यह दोहरे मापदंड के अलावा और कुछ नहीं है. यह संस्थाओं पर सवाल उठाने के अलावा और कुछ नहीं है.

पहले विपक्ष सीबीआई, ईडी और दूसरी जांच एजेंसियों की आलोचना करता था. अब वे चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं. कल वे किसी और चीज पर सवाल उठाएंगे. इस पर पूर्व जस्टिस पी. एन. रवींद्रन ने कहा कि वे दूसरों के हाथों की कठपुतली बन रहे हैं. वे विदेशी स्वार्थों के निहित में हैं. वे चाहते हैं कि देश में गरीबी पनपे, देश का विकास न हो, हर कोई उनके अधीन रहे. वे दिल्ली में शांतिपूर्ण जीवन नहीं चलने देंगे.

राहुल गांधी सीईसी से मिलने की मांग कर रहे हैं. इसको लेकर उन्होंने कहा कि वह सीईसी से मिल सकते हैं. वह विपक्ष के नेता हैं, हालांकि ऐसा करने का तरीका और साधन होता है. वे सीईसी को कोई पत्र भेज सकते हैं, अपॉइंटमेंट मांग सकते हैं. अगर जवाब नहीं आता है, तो वह शिकायत कर सकते हैं.

उन्होंने कहा कि यह सब बाहर की ताकतों द्वारा किया जा रहा है. वे उन्हीं के इशारों पर काम कर रहे हैं. इसलिए मैं प्रार्थना करूंगा कि India में शांति बनी रहे. देश तरक्की करे. India की तरक्की का मतलब है 140 करोड़ भारतीयों की तरक्की. हर राजनेता का यही मकसद होना चाहिए.

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डीके/