
बीजिंग, 2 सितंबर . 2030 यूएन सतत विकास के लक्ष्य पूरा करने के लिए महज चार साल बाकी हैं, लेकिन वैश्विक विकास की स्थिति में रेड लाइट चमक रही है.
139 मूल्यांकन सूचकांकों में सिर्फ 36 प्रतिशत सूचकांक सुचारू रूप से आगे बढ़ रहे हैं, करीब आधे सूचकांक बहुत धीमी गति से चल रहे हैं और करीब 15 प्रतिशत सूचकांक बेसिक लाइन के नीचे गिर पड़े. हर दस व्यक्तियों में से एक अति गरीब है और 230 लोग अनाज के अभाव का सामना कर रहे हैं. दक्षिण और उत्तर के बीच खाई निरंतर बढ़ रही है.
कहा जा सकता है कि विश्व दीर्घस्थायी बीमारी से पीड़ित है. इस बीमारी के इलाज के लिए चीनी President शी चिनफिंग ने 2021 वर्ष में यूएन महासभा पर वैश्विक विकास पहल प्रस्तुत की, जो एक नुस्खे की तरह है. इस पहल में विकास पर प्राथमिकता देना, जन केंद्रित होना, सार्वभौमिकता और समावेश, सृजन से संचालित होना, मानव तथा प्रकृति का समंजस्यपूर्ण सहअस्तित्व और कार्रवाई उन्मुख होना शामिल है. पिछले पांच साल में चीनी बुद्धिमता पर आधारित इस नुस्खे ने वैश्विक विकास बढ़ाने में ठोस प्रगति प्राप्त की है.
ध्यान रहे वर्तमान वैश्विक शासन में एक मुख्य सवाल है कि विकास का मुद्दा लंबे समय से दरकिनार किया गया है. शी चिनफिंग ने कई बार बताया कि विकास सभी समस्याओं के समाधान की कुंजी है. उनके विचार में खतरे और मतभेद की वृद्धि के दौर में विकास को वैश्विक एजेंडे के केंद्रीय स्थान पर रखना चाहिए.
अब तक करीब 130 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने वैश्विक विकास पहल में भाग लिया है. करीब 100 देशों ने चीनी पक्ष के साथ सहयोग दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं. वैश्विक विकास पहल के मित्रों के समूह में 88 देश शामिल हुए हैं. इस पहल के प्रति विभिन्न देशों की सक्रिय हिस्सेदारी से इस नुस्खे का व्यावहारिक मूल्य दर्शाया गया है.
चीन-संयुक्त राष्ट्र शांति व विकास कोष, वैश्विक विकास तथा दक्षिण दक्षिण सहयोग कोष आदि मंचों के जरिए वैश्विक विकास पहल ने 2,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर की पूंजी प्रेरित की है. चीन ने वैश्विक विकास तथा दक्षिण दक्षिण सहयोग कोष में 400 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पूंजी लगाई. इस पहल के तहत 1,800 से अधिक सहयोगी परियोजनाएं लागू की गई हैं और 2 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, जिससे 120 से अधिक देशों के आम लोगों को लाभ मिला है.
पांच साल के व्यवहार से साबित है कि वैश्विक विकास पहल की दिशा एकदम सही है और उसकी व्यावहारिक और मजबूत प्रभावकारिता है. भविष्य में अगर विभिन्न देश इस रास्ते पर चलते रहें, तो उसका प्रभाव और बड़ा होगा और अंत में सब लोग वैश्विक विकास का लाभ साझा कर सकेंगे.
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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एबीएम/
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