वीरमणि के पॉक्सो मामले से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर डीएमके ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका, 1.1 करोड़ हर्जाने की मांग

चेन्नई, 28 सितंबर . द्रविड़ मुन्नेत्र कजगम (डीएमके) ने मद्रास हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में आरोप लगाया है कि ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (टीवीके ) के सदस्यों ने कोर्ट की उस सलाह को नहीं माना, जिसमें कहा गया था कि पॉक्सो मामले में गिरफ्तार ‘जेम ग्रेनाइट’ के मालिक वीरमणि से जुड़े मामले का Politicalरण न किया जाए. इसके साथ ही मानहानि के तहत 1.1 करोड़ रुपये हर्जाना मांगा है.

आरोप है कि तमिलनाडु के मंत्री सीटीआर निर्मलकुमार और आधव अर्जुन ने इंटरव्यू में आरोप लगाया था कि पिछली डीएमके Government ‘जेम ग्रेनाइट’ के मालिक वीरमणि के खिलाफ सही कार्रवाई करने में नाकाम रही थी. वीरमणि पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण का आरोप है और उन पर कानूनी कार्रवाई नहीं होने दी गई थी. इसी तरह टीवीके के आईटी विंग ने भी social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर डीएमके Government के खिलाफ आरोप पोस्ट किए थे.

पार्टी का कहना है कि इन बयानों से डीएमके की बदनामी हुई है. इसलिए, पार्टी के जनरल सेक्रेटरी और पूर्व मंत्री दुरई मुरुगन ने मद्रास हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है. इस याचिका में मांग की गई है कि मंत्री निर्मल कुमार, आधव अर्जुन और टीवीके आईटी विंग को ‘जेम वीरमणि’ मामले में डीएमके Government को दोषी ठहराने वाले बयान देने से रोकने के लिए आदेश जारी किया जाए.

याचिका में यह भी मांग की गई है कि मंत्री निर्मल कुमार, आधव अर्जुन और टीवीके आईटी विंग को मानहानि के लिए 1.1 करोड़ का हर्जाना देने का भी आदेश दिया जाए. याचिका में कहा गया कि भले ही जेम वीरमणि के खिलाफ 6 अक्टूबर 2025 को शिकायत मिली थी लेकिन अगले ही दिन मामला दर्ज कर लिया गया और बिना किसी दखल या देरी के तुरंत कार्रवाई की गई.

डीएमके ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री और सत्ताधारी पार्टी का आईटी विंग डीएमके के खिलाफ तथ्यों के उलट बातें फैला रहे हैं और पार्टी की छवि खराब कर रहे हैं. याचिका में social media कंपनियों को निर्देश देने की भी मांग की गई कि वे मंत्रियों और टीवीके आईटी विंग द्वारा इस मामले में डीएके पर आरोप लगाते हुए पोस्ट किए गए वीडियो और पोस्ट को हटा दें.

जस्टिस गोविंदराजन थिलाकवती के सामने सुनवाई के दौरान मंत्रियों और टीवीके आईटी विंग ने कहा कि याचिका सुनवाई के लायक नहीं है. इसके बाद जज ने प्रतिवादियों को अपने जवाब (काउंटर-एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले की Monday को फिर से सुनवाई हुई तो डीएमके की ओर से पेश सीनियर वकील जे. रवींद्रन ने बताया कि सिर्फ एक जवाब दाखिल किया गया है और बाकी प्रतिवादियों ने अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है.

इसके बाद जज ने प्रतिवादियों को अपने जवाब दाखिल करने का मौका देने के लिए मामले की सुनवाई 30 सितंबर तक के लिए टाल दी. सीनियर वकील जे. रवींद्रन ने कहा कि डीएमके सदस्य जेम वीरमणि मामले का Politicalरण न करने की हाईकोर्ट की सलाह मान रहे थे जबकि टीवीके सदस्य इस मामले पर लगातार बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि टीवीके सदस्यों को कोर्ट का सम्मान करना चाहिए. इसके जवाब में जज ने कहा कि एडवोकेट जनरल को इस मामले पर विचार करना चाहिए.

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