
New Delhi, 9 सितंबर . ब्रिक्स के विस्तारित स्वरूप से India को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, संप्रभु समानता, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों के बेहतर प्रतिनिधित्व जैसे सिद्धांतों को आगे बढ़ाने में अधिक कूटनीतिक ताकत मिल सकती है. हालांकि, India का उद्देश्य ब्रिक्स के जरिए मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को बदलना नहीं, बल्कि उसके भीतर अपनी सौदेबाजी की क्षमता मजबूत करना है. यह बात स्वीडन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर सिक्योरिटी एंड डेवलपमेंट पॉलिसी (आईएसडीपी) की एक रिपोर्ट में कही गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स के विस्तार से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक और अन्य वैश्विक संस्थाओं में सुधार की India की मांग को मजबूती मिलेगी, क्योंकि मौजूदा संस्थाएं वर्तमान आर्थिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करतीं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि विस्तारित ब्रिक्स India को ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं- विकास वित्तपोषण, जलवायु न्याय, प्रौद्योगिकी तक पहुंच, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला तथा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ाने का व्यापक मंच भी उपलब्ध कराता है.
आईएसडीपी ने कहा कि New Delhi के लिए ब्रिक्स प्लस को केवल चीन के प्रभाव के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए. विस्तारित समूह India को नए सदस्य देशों के साथ गठबंधन बनाने और ग्लोबल साउथ में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर देता है.
रिपोर्ट में कहा गया कि इस सप्ताह New Delhi में होने वाला ब्रिक्स शिखर सम्मेलन India की विदेश नीति और ब्रिक्स दोनों के लिए अहम मोड़ साबित हो सकता है. अब ब्रिक्स केवल पांच उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मंच नहीं रह गया है, बल्कि इसका भौगोलिक दायरा, जनसंख्या और आर्थिक प्रभाव काफी बढ़ चुका है.
हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी कहा कि विस्तारित ब्रिक्स India के सामने कई संतुलन साधने की चुनौती भी रखता है. India को चीन के साथ संबंधों का प्रबंधन करना होगा, लेकिन ब्रिक्स को चीन-केंद्रित नहीं बनने देना होगा. साथ ही रूस के साथ साझेदारी बनाए रखते हुए पश्चिम के साथ उसके टकराव का हिस्सा बनने से बचना होगा. ईरान के हितों को भी जगह देनी होगी, लेकिन ब्रिक्स को पश्चिम विरोधी मंच बनने से रोकना होगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात जैसे व्यावहारिक मध्य शक्तियों के साथ संबंध मजबूत करना और नए सदस्य देशों को जोड़ते हुए समूह की प्रभावशीलता बनाए रखना भी India की बड़ी जिम्मेदारी होगी.
आईएसडीपी ने कहा कि विस्तारित ब्रिक्स India के लिए मध्य पूर्व, अफ्रीका, एशिया और व्यापक ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अधिक व्यवस्थित जुड़ाव का अवसर है. इनमें कई देश खुद को न तो पश्चिमी खेमे का हिस्सा मानते हैं और न ही चीनी खेमे का, जो India की बहुध्रुवीय विदेश नीति के अनुरूप है.
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डीएससी
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