
New Delhi, 8 अक्टूबर . डाक सेवा समाज और देश के संचार, वित्तीय और सामाजिक विकास की रीढ़ है, जो कम खर्च में सबसे दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों तक भी अपनी पहुंच बनाती है. डाक सेवा के महत्व को समझते हुए, इसके बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है. डाक दिवस के दिन से ही राष्ट्रीय डाक सप्ताह का शुभारंभ हो जाता है, जो इस वर्ष 9 से 15 अक्टूबर तक मनाया जाएगा.
विश्व डाक दिवस ‘यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’ की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है. दरअसल, 9 अक्टूबर 1874 को स्विट्जरलैंड की राजधानी बर्न में 22 देशों ने एक संधि पर हस्ताक्षर करके ‘यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’ का गठन किया था. इसी ऐतिहासिक दिन की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हर वर्ष 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस मनाया जाता है.
9 अक्टूबर को ‘विश्व डाक दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा सबसे पहले वर्ष 1969 में जापान के टोक्यो में आयोजित यूनिवर्सल पोस्टल कांग्रेस के दौरान की गई थी. इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों के रोजमर्रा के जीवन, वैश्विक सामाजिक और आर्थिक विकास में डाक की भूमिका के प्रति जागरूकता फैलाना है.
इस वर्ष विश्व डाक दिवस मनाने की थीम ‘एक डाक नेटवर्क, अनंत संभावनाएं’ है. विश्व डाक दिवस और राष्ट्रीय डाक सप्ताह के दौरान विभिन्न कार्यक्रम और समारोह आयोजित कर पारंपरिक चिट्ठियों से लेकर डिजिटल लॉजिस्टिक्स, बैंकिंग और ई-कॉमर्स सेवाओं की जानकारी दी जाती है. यह दिन दुनिया भर में सीमाओं के पार पत्र-व्यवहार और संचार को कुशल और किफायती तरीके से सुलभ बनाने में डाक नेटवर्क के महत्व को उजागर करता है.
भारतीय डाक दुनिया का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क है. India में डाक व्यवस्था की शुरुआत 1766 में हुई थी. India ‘यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन’ का सदस्य 1 जुलाई 1876 को बना था. वर्तमान समय में देशभर में 1,64,999 डाकघर कार्यरत हैं. इनमें शहरी डाकघर की संख्या 15,614 और ग्रामीण डाकघर 1,49,385 हैं. वहीं, मुख्य डाकघर 810, उप-डाकघर 24,281 और शाखा डाकघर 13,990 हैं.
बता दें कि औसतन, एक डाकघर देश में 7,339 लोगों को सेवा प्रदान करता है. वहीं, डाकघर द्वारा सेवा प्रदान किया जाने वाला औसत क्षेत्रः 19.92 वर्ग किलोमीटर है.
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डीके/डीकेपी
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