
Bengaluru, 3 सितंबर . कर्नाटक Government ने Thursday को कैबिनेट बैठक में ‘कर्नाटक पार्क संरक्षण (संशोधन) बिल’ को वापस लेने का फैसला किया. यह कदम जनता और विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बीच उठाया गया.
उपChief Minister जी परमेश्वर ने कहा, “सरकारी पार्कों की सुरक्षा के लिए एक कानून लाया गया था. विपक्षी दल इस मुद्दे पर चर्चा के लिए आगे नहीं आए. इसके बजाय उन्होंने जनता के बीच गलत संदेश भेजा. हमने बिल वापस ले लिया है और इस फैसले के बारे में Governor को सूचित करेंगे. इसके बाद बिल को अगले विधानसभा सत्र में चर्चा के लिए फिर से लाया जाएगा.”
राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों ने भाजपा और जेडी(एस) के कड़े विरोध के बीच इस बिल को पारित किया था. कांग्रेस Government ने इस बिल को Governor की मंजूरी के लिए भी भेजा था.
Chief Minister के कानूनी सलाहकार और कांग्रेस विधायक एएस पोन्नान्ना ने कहा कि Government ने इस कानून से जुड़ी चिंताओं को गंभीरता से लिया है.
पोन्नान्ना ने उन दावों को खारिज कर दिया कि इस संशोधन का मकसद Government को निजी उद्देश्यों के लिए पार्क की पांच प्रतिशत जमीन लेने या बेचने की अनुमति देना था. उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का मकसद बार-बार विधानमंडल में संशोधन लाने की जरूरत से बचना था, जब भी किसी जरूरी हालात में सार्वजनिक परियोजना के लिए पार्क की जमीन का इस्तेमाल करना पड़े.
पोन्नान्ना ने कहा, “यह कहना गलत है कि पार्क की पांच प्रतिशत जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा. जब भी सार्वजनिक परियोजनाएं लागू की जाती हैं और ऐसी जरूरी स्थिति बनती है जिसमें पार्क की जमीन का इस्तेमाल करना पड़े तो मामला पारंपरिक रूप से विधानमंडल के सामने लाया जाता रहा है और संशोधन किया जाता रहा है.”
उन्होंने बताया कि संशोधन का मकसद Government को सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए पार्क की पांच प्रतिशत तक जमीन का इस्तेमाल करने का तरीका देना था, ताकि हर बार अलग से विधायी संशोधन की जरूरत न पड़े. उन्होंने कहा कि Government यह तय करेगी कि किन सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए यदि कोई हो, ऐसी जमीन की जरूरत होगी.
पोन्नान्ना ने कहा कि इस प्रावधान को गलत तरीके से पेश किया गया और यह दावा करके Political प्रचार किया जा रहा है कि पार्कों को बेच दिया जाएगा या उनकी जमीन ले ली जाएगी.
उन्होंने कहा, “इसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और प्रचार किया जा रहा है कि पार्कों को बेचा जा रहा है और पार्क की जमीनें छीनी जा रही हैं. लोगों को घबराना नहीं चाहिए. हम उनके हितों की रक्षा के लिए यहां हैं. Government जिम्मेदारी और संविधान के अनुसार काम कर रही है.”
उन्होंने बताया कि Chief Minister डीके शिवकुमार ने संशोधन को लेकर जताई गई चिंताओं पर ध्यान दिया है.
पिछली विधानसभा सत्र में पारित होने के बाद ‘कर्नाटक पार्क संरक्षण (संशोधन) विधेयक’ का बड़े पैमाने पर विरोध हुआ था. आलोचकों ने पार्क की जमीन के पांच प्रतिशत हिस्से तक को सार्वजनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति देने वाले प्रावधान पर चिंता जताई थी. उनका तर्क था कि इससे Bengaluru के हरे-भरे इलाकों पर बुरा असर पड़ सकता है.
Bengaluru के पार्कों को शहर के ‘फेफड़े’ माना जाता है. पर्यावरणविदों और नागरिकों ने आशंका जताई है कि पार्क की जमीन के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए करने की अनुमति देने से शहर का हरा-भरा दायरा धीरे-धीरे कम हो सकता है.
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एएसएच/डीकेपी
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