विद्या मनुष्य को लोक-व्यवहार की समझ और ज्ञान-समृद्धि प्रदान करती है, पीएम मोदी ने शेयर किया सुभाषित

New Delhi, 9 सितंबर . Prime Minister Narendra Modi की ओर से Wednesday को social media ‘एक्स ‘पर सुभाषित साझा किया गया है. प्रधानंमत्री ने संस्कृत ग्रंथ ‘हरिहर सुभाषितम्’ के श्लोक “उपदिशति लोकवृत्तं वितरति वित्तं विनोदयति चित्तम्. उत्तम्भयति महत्त्वं विद्या हृद्या सुराजसेवेव॥” को एक्स पोस्ट में लिखा है.

यह श्लोक इति श्रीहरिहरसुभाषिते बालविनयप्रकरणम् ॥२॥ का 7वां श्लोक है. इस श्लोक का अर्थ होता है, “विद्या मनुष्य को लोक-व्यवहार की समझ देती है, ज्ञान व समृद्धि प्रदान करती है, उसके मन को आह्लादित करती है तथा महत्व को बढ़ाती है. इसलिए विद्या सुशासन की सेवा के समान हृदय को प्रिय और जीवन को उन्नत बनाने वाली है.”

बता दें कि हरिहर सुभाषितम् संस्कृत साहित्य का एक प्रसिद्ध सुभाषित ग्रंथ है. इस ग्रंथ में सुंदर सूक्तियों (अच्छी बातों), नैतिक शिक्षाओं और जीवन के गहरे मूल्यों का अनमोल संग्रह है. संस्कृत में ‘सुभाषित’ का अर्थ होता है, सुंदर या मधुर वचन, जो मनुष्य को सही मार्ग दिखाते हैं.

इसके पहले Prime Minister Narendra Modi की ओर से Tuesday को एक्स पर “अणुभ्यश्च महद्भ्यश्च शास्त्रेभ्यः कुशलो नरः. सर्वतः सारमादद्यात् पुष्पेभ्य इव षट्पदः॥ सुभाषित साझा किया था, जिसका हिंदी में अर्थ है कि विवेकी और कुशल व्यक्ति को छोटे-बड़े सभी शास्त्रों से, चाहे वे किसी भी विषय के हों, उपयोगी सारतत्व को ग्रहण करना चाहिए. जैसे भौंरा विभिन्न पुष्पों से केवल उनके मधुरस का सार ग्रहण करता है, वैसे ही मनुष्य को भी हर स्रोत से ज्ञान का श्रेष्ठ और उपयोगी अंश आत्मसात करना चाहिए.

वहीं, Monday को Prime Minister की ओर से एक्स पर लिखा गया था, “शं नो वातः पवतां शं नस्तपतु सूर्यः. शं नः कनिक्रदद् देवः पर्जन्योऽभिवर्षतु॥” जिसका हिंदी अर्थ है कि हमारे लिए वायु कल्याणकारी, सुखद और शुद्ध होकर बहे, सूर्य देव हमारे लिए कल्याणकारी होकर तपे अर्थात् उनका ताप सुख देने वाला हो और दिव्य गर्जना करने वाले वरुणदेव हमारे ऊपर कल्याणकारी जल की वर्षा करें.

ओपी/एएस