
पुणे, 6 अक्टूबर . Maharashtra लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर पुणे में छात्रों का एक बड़ा आंदोलन चल रहा है. इस आंदोलन का जमीनी नेतृत्व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार कर रहे हैं. इस बीच मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरंगे पाटिल भी आंदोलन में शामिल हुए. उन्होंने छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों को लेकर Government पर निशाना साधा.
मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, “बच्चों, अगर इन लोगों ने आपकी बात नहीं सुनी तो यहां बैठे सभी नेताओं से भी कहता हूं और आपसे भी कहता हूं, आपके लिए पूरा Maharashtra बंद कर देंगे. इन्हें क्या हो गया है, इन्हें घमंड हो गया है.”
उन्होंने छात्रों से कहा, “आपके साथ हुआ अन्याय जाति से परे है. अगर मैं जातिवादी होता तो यहां नहीं आता. यहां Maharashtra के किसानों के बच्चे बैठे हैं और मैं किसान का बेटा बनकर आया हूं, जाति के नाम पर नहीं.”
जरांगे पाटिल ने कहा कि आरक्षण की मांग करने का मतलब यह नहीं है कि वे छात्रों को उनके हाल पर छोड़ देंगे. उन्होंने कहा कि मेहनतकश माता-पिता की उम्मीद है कि उनके बेटे और बेटियां भी अधिकारी बनें और Government को इस भावना को समझना चाहिए.
छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने को राजनीति बताने पर भी जरांगे पाटिल ने सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि क्या Government चाहती है कि छात्रों के पीछे कोई खड़ा न हो और उन्हें कोई ताकत न मिले.
उन्होंने पूछा, “रोहित दादा Political नेतृत्व करते हैं, इस पर किसी को संदेह है तो राज्य Government मुझे इसका जवाब दे. इससे पहले एमपीएससी में दो साल की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था. क्या वह Political था? फिर यह आंदोलन Political कैसे हुआ? आज बच्चे अनशन पर बैठे हैं. उनकी जान का क्या? उनके सवालों का क्या? आप हर बात को Political रंग क्यों देंगे?”
पत्रकारों से बातचीत में जरांगे पाटिल ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और सीएम फडणवीस को जवाब देना चाहिए. गृहमंत्री के तौर पर उन्हें विद्यार्थियों का दिल जीतने का काम करना चाहिए.
छात्रों के बीच तीन गुटों में आंदोलन होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “न कांग्रेस आपकी है, न राष्ट्रवादी आपकी है, न भाजपा आपकी है, न शिवसेना आपकी है, न महायुति आपकी है, न महाविकास आघाड़ी आपकी है. हमारे असली हीरो हमारे माता-पिता हैं. वे मेहनत करके हमें पढ़ाते हैं.”
उन्होंने कहा कि आंदोलन तीन जगह हो या एक जगह, न्याय छात्रों को ही चाहिए. Chief Minister को सभी आंदोलनों पर तत्काल ध्यान देकर उनकी मांगें पूरी करनी चाहिए और उनका विश्वास जीतना चाहिए. उन्होंने छात्रों से एकजुट रहने की अपील भी की.
Government के मंत्री और विधायक एक आंदोलन की ओर जा रहे हैं जबकि दूसरे आंदोलन की ओर Government का प्रतिनिधिमंडल नहीं आया है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि Government को सभी जगह जाना चाहिए और छात्रों की राय सुननी चाहिए.
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पीआईएम/पीएम
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