
New Delhi, 2 सितंबर . जोहो के मुख्य वैज्ञानिक और सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने Wednesday को कहा कि Prime Minister Narendra Modi की विदेश यात्रा, सोने की खरीद और फिजूलखर्ची पर रोक की अपील का उद्देश्य India के तीव्र विकास चरण के दौरान आयात पर निर्भरता के कारण आवश्यक विदेशी मुद्रा का संरक्षण करना है.
श्रीधर वेम्बू ने पूर्वी एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ तुलना करते हुए कहा कि India भी उसी राह पर है, जहां जीडीपी में तेजी से विस्तार के साथ-साथ विदेशी मुद्रा का सोच-समझकर संरक्षण किया जाता है.
वेम्बू ने social media पोस्ट में कहा, “अगर अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, तो Prime Minister हमसे विदेश यात्रा न करने, सोना न खरीदने, विदेश में शादी न करने आदि के लिए क्यों कह रहे हैं?” उन्होंने तर्क दिया कि India की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के साथ-साथ, तीव्र विस्तार से आयातित ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी इनपुट की मांग भी बढ़ती है.
उन्होंने कहा, “वास्तव में अर्थव्यवस्था जितनी तेजी से बढ़ती है, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी दोनों की आवश्यकता उतनी ही अधिक होती है.” उन्होंने कहा कि सटीक मशीनों, सामग्रियों, सीपीयू, जीपीयू और उन्नत सॉफ्टवेयर के भुगतान के लिए विदेशी मुद्रा की आवश्यकता भी बढ़ रही है.
वेम्बू ने कहा कि India की अर्थव्यवस्था “अच्छी दर से बढ़ रही है, लेकिन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हमारी आयात पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है,” जिसे संतुलित करने के लिए देश को अधिक निर्यात करना होगा.
वेम्बू ने कहा, “इन सभी क्षेत्रों में बराबरी करने में समय लगता है, जो अक्सर दशकों में मापा जाता है. हमने अच्छी शुरुआत की है, लेकिन हमें समय चाहिए. देखिए पूर्वी एशिया को पश्चिम के बराबर आने में कितना समय लगा. उनकी अर्थव्यवस्थाएं तेजी से बढ़ रही थीं, जबकि वे विदेशी मुद्रा संरक्षण के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे.”
जोहो के सह-संस्थापक ने कहा कि Government अनावश्यक विदेशी यात्रा और सोने की खरीद पर रोक लगाकर इसे हासिल करना चाहती है.
उन्होंने कहा, “एक बार जब हम सभी उन्नत प्रौद्योगिकियों में दक्षता हासिल कर लेंगे और नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से ऊर्जा स्वतंत्रता प्राप्त कर लेंगे, जिसके लिए हम प्रौद्योगिकी विकसित करते हैं, तो हमें विदेशी मुद्रा का संरक्षण करने की आवश्यकता नहीं रहेगी.”
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एसएचके/पीएम
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