
New Delhi, 24 सितंबर . Prime Minister Narendra Modi की ओर से Thursday को social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लोगों को अच्छी वाणी बोलने का संदेश देते हुए सुभाषित साझा किया गया है. इस पोस्ट के माध्यम से पीएम की ओर से संदेश दिया गया है कि विचारपूर्वक बोली गई वाणी से समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का संचार होता है.
Prime Minister की ओर से संस्कृत श्लोक, “अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं च यत्. स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ्मयं तप उच्यते॥” साझा किया गया है, जिसका हिंदी भावार्थ है कि मनुष्य को सदैव ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जो सत्य, प्रिय और हितकारी हो और किसी के मन में अशांति उत्पन्न न करे. सद्ग्रंथों का निरंतर स्वाध्याय और चिंतन ही वाणी को वास्तविक सार्थकता प्रदान करता है. विचारपूर्वक बोली गई वाणी समाज में शांति, सद्भाव और सकारात्मकता का संचार करती है.
Prime Minister की ओर से श्रीमद्भगवद्गीता के 17वें अध्याय का श्लोक 15वां श्लोक साझा किया गया है, जिसमें वाणी की तपस्या (वाङ्मय तप) के बारे में बताया गया है. इस श्लोक के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने वाणी के तप (वाङ्मय तप) के बारे में बताया है.
इस श्लोक का सार यह है कि दूसरों को कष्ट न पहुंचाने वाले सत्य और प्रिय वचन बोलना तथा वेदों व शास्त्रों का अभ्यास करना ही वाणी की सच्ची तपस्या है. इस श्लोक के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो वाणी किसी के मन में उद्वेग (हलचल, भय, या मानसिक कष्ट) पैदा न करे, जो सत्य हो, जो सुनने में प्रिय (सुखद) हो और हितकारी (कल्याणकारी) हो, तथा साथ ही वेदों व शास्त्रों का नियमित स्वाध्याय (अध्ययन) और अभ्यास हो, इसे ही ‘वाङ्मय तप’ (वाणी की तपस्या) कहा जाता है.
इस श्लोक का भावार्थ है कि शरीर को कष्ट देना ही तप नहीं है. हमारी जुबान (वाणी) की ऊर्जा बहुत बड़ी होती है. शब्दों में आहत करने या संवारने की ताकत होती है. इसलिए बिना अहंकार के, प्यार भरी और सच्ची भाषा का प्रयोग करना तथा खुद को ज्ञान से जोड़ना, यही वाणी का सबसे बड़ा और श्रेष्ठ तप है.
–
एसडी/
Skip to content