वाराणसी : 64 दिन बाद दशाश्वमेध घाट पर लौटी गंगा आरती, जलस्तर घटने से 84 घाटों का संपर्क बहाल

वाराणसी, 20 अक्टूबर . जल स्तर कम होने के बाद काशी के प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर 64 दिनों के अंतराल के बाद गंगा आरती फिर से अपने निर्धारित स्थान पर शुरू हो गई है. इससे काशी के लगभग 84 घाटों के बीच आवाजाही भी फिर से बहाल हो गई है.

छठ पूजा और देव दीपावली को देखते हुए घाटों की साफ-सफाई और सजावट का काम तेजी से चल रहा है. गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने से बात करते हुए इस बारे में जानकारी दी.

उन्होंने कहा, “हर वर्ष की भांति इस साल भी मां गंगा के जलस्तर में वृद्धि हुई थी. अभी वर्तमान में जलस्तर बहुत कम हो चुका है. लेकिन अभी भी वह अपने निर्धारित स्थान से 10-15 फीट ऊपर है. दशाश्वमेध घाट के साथ-साथ काशी के 84 घाट जो अर्धचंद्राकार में हैं. उन सभी घाटों का संपर्क पूरी तरह से खुल गया है. लोग एक घाट से दूसरे घाट पर जा सकते हैं. बाढ़ के बाद जो मिट्टी आती है, उसकी पूरी साफ-सफाई चल रही है.”

उन्होंने आगे बताया कि आने वाले त्योहारों को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं.

सुशांत मिश्रा ने कहा, “नवरात्रि के बाद आने वाले पर्व जैसे देव दीपावली और छठ हैं, उनको लेकर भी तेजी से तैयारी चल रही है. दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा मां गंगा की जो दैनिक आरती होती है, वह बाढ़ के दिनों में करीब 64 दिनों तक गंगा सेवा निधि के कार्यालय की छत पर हुई और आज 64 दिनों बाद आरती का जो निर्धारित स्थान है, वहां पर आरती हो रही है, जहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु आरती में शामिल हुए. 17 अगस्त को आरती कार्यालय की छत पर हुई थी. आज 65वें दिन गंगा आरती अपने भव्य स्वरूप में हुई. सजावट के कार्य धीरे-धीरे होते रहेंगे.”

बाढ़ के कारण पिछले दो महीनों से गंगा आरती घाट पर नहीं हो पा रही थी और उसे गंगा सेवा निधि के कार्यालय की छत पर आयोजित किया जा रहा था. अब जलस्तर घटने के बाद आरती अपने मूल स्वरूप में लौट आई है, जिससे श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है. हजारों श्रद्धालु आरती में शामिल होने के लिए घाट पर पहुंचे.

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एससीएच/एबीएम