
वाराणसी, 7 अक्टूबर . उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय ‘नमो बुक फेस्ट : जेन वी फेस्टिवल’ की शुरुआत हुई. इस विशेष पुस्तक महोत्सव में Prime Minister Narendra Modi के व्यक्तित्व, नेतृत्व और उनकी Government की नीतियों पर आधारित 500 से अधिक पुस्तकों को एक ही छत के नीचे प्रदर्शित किया गया है. इसके साथ ही अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटलाइजेशन और आध्यात्मिकता जैसे विषयों पर लिखी गई किताबें भी इस फेस्ट का हिस्सा हैं.
फेस्टिवल के आयोजक डॉ. पवन विजय ने से बातचीत में इसके उद्देश्य पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में Prime Minister मोदी पर 500 से ज्यादा किताबें लिखी जा चुकी हैं. ये किताबें केवल जीवनी नहीं, बल्कि उनकी योजनाओं का ब्लू-प्रिंट हैं. चाहे डिजिटल इंडिया हो, विदेश नीति हो, सुरक्षा का मुद्दा हो या ‘विकसित भारत’ का विजन हो, हर पहलू पर लेखकों ने गहन अध्ययन कर किताबें लिखी हैं.
डॉ. विजय ने बताया कि इस फेस्ट का मुख्य कॉन्सेप्ट इन सभी किताबों का एक साथ आकलन करना है. India के अलग-अलग क्षेत्रों में Government द्वारा किए गए प्रयासों और योजनाओं पर जो कुछ लिखा गया है, उसे एक जगह लाकर युवाओं तक पहुंचाना इसका लक्ष्य है. इसीलिए इसे ‘नमो बुक फेस्ट : जेन वी फेस्टिवल’ नाम दिया गया है.
उन्होंने कहा कि इस फेस्ट में जो पीढ़ी शामिल हो रही है, उसे हम जेन-वी मानते हैं. यह वह पीढ़ी है, जिसके पास विजन है और जो ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करेगी. हमारा प्रमुख मकसद सरकारी योजनाओं, नीतियों और Government के दृष्टिकोण के साथ इस युवा पीढ़ी का सीधा संवाद कराना है.
कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की जानकारी भी उन्होंने दी. दो दिनों तक अलग-अलग सत्रों में कई लेखक और विशेषज्ञ चर्चा में भाग लेंगे. इनमें प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी, विशाल सहाय और अशोक श्रीवास्तव जैसे नाम शामिल हैं, जो अलग-अलग पैनल डिस्कशन का हिस्सा बनेंगे.
फेस्ट में साहित्य के अलावा सिनेमा और रोमांच का भी संगम देखने को मिलेगा. फिल्म ‘हनुमान अंश’ की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर और प्रसिद्ध बाइकर कंचन भी इस कार्यक्रम में शिरकत करेंगी.
डॉ. पवन विजय ने बताया कि इस आयोजन के लिए 7 और 8 अक्टूबर की तारीख इसलिए चुनी गई है क्योंकि 7 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक है. 7 अक्टूबर 2001 को ही Narendra Modi ने पहली बार संवैधानिक पद की शपथ ली थी. इस लिहाज से आज उनके सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे हो रहे हैं. यह बुक फेस्ट एक तरह से उनके 25 साल के कार्यकाल का लेखा-जोखा भी है.
पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल के सफर पर पूछे गए सवाल पर डॉ. विजय ने कहा कि इसका असली मूल्यांकन जनता कर रही है. जनता ने ही उन्हें लगातार 25 साल तक संवैधानिक पदों पर काम करने का अवसर दिया है. यह जनता के विश्वास का ही प्रतीक है और इस फेस्ट में भी उसी जन-विश्वास पर चर्चा होगी.
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पीआईएम/एबीएम
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