वायुसेना की लड़ाकू ताकत को तय स्तर तक पहुंचाना पहली प्राथमिकता: एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित

New Delhi, 1 नवंबर . भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने Sunday को गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि वायुसेना ‘वायु’ के चार सूत्रों पर काम करेगी. वायुसेना प्रमुख ने अपनी प्राथमिकताएं भी स्पष्ट कर दीं.

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने अपनी प्राथमिकताओं को ‘वायु’ नाम के चार सूत्रों में बांटा है. इनमें सतर्कता और तत्परता, आत्मनिर्भरता, नवाचार और एकजुट प्रयास शामिल हैं. उन्होंने कहा कि वायुसेना की लड़ाकू ताकत को तय स्तर तक पहुंचाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी. इस दौरान वह एक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) से पहुंचे. राष्ट्रीय राजधानी में भारतीय वायुसेना प्रमुख की आधिकारिक गाड़ी के रूप में इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल पहली बार किया गया है.

इससे पहले उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी. वायुसेना प्रमुख ने अपनी मां निर्मला दीक्षित और सास कमला पांडे के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया. देश के वीर जवानों को नमन करने के बाद परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लेकर उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी की शुरुआत की. एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कमान संभालने पर सम्मान और गर्व जताया.

उन्होंने President, Prime Minister और रक्षा मंत्री का उन पर भरोसा जताने के लिए आभार व्यक्त किया. उन्होंने निवर्तमान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का भी धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के नेतृत्व में वायुसेना ने दिखाया कि सटीक और निर्णायक हवाई शक्ति क्या कर सकती है. उन्होंने कहा कि एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने उन्हें पूरी तरह तैयार वायुसेना की कमान सौंपी है.

नए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं. इसके साथ ही नई तकनीकों और प्रणालियों के कारण युद्ध का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है. इनमें ड्रोन, लंबी दूरी तक मार करने वाले सटीक हथियार, अंतरिक्ष, साइबर, एआई जैसी तकनीकें शामिल हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना को अगले दशक की जरूरतों के मुताबिक बदलना होगा. हालांकि, इस बदलाव के साथ हर समय युद्ध लड़ने और जीतने के लिए तैयार रहना भी जरूरी है.

उन्होंने कहा कि वायुसेना का हर स्क्वाड्रन, रडार, वायु रक्षा इकाई और प्रत्येक वायु योद्धा किसी भी समय जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए. आत्मनिर्भरता के तहत तेजस एमके-1ए और एमके-2, एएमसीए, भारतीय सेंसर और स्वदेशी हथियारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी.

उन्होंने कहा कि वायुसेना भारतीय समाधानों के साथ युद्ध लड़ेगी और अभियान संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए इन्हें पर्याप्त संख्या में शामिल करेगी. नवाचार के तहत युद्ध की रणनीति, प्रक्रियाओं और तकनीक में नए बदलावों पर ध्यान दिया जाएगा. इसमें नेटवर्क आधारित और एआई से युक्त कमान एवं नियंत्रण प्रणाली, ड्रोन रोधी बहुस्तरीय सुरक्षा, बेहतर रखरखाव व्यवस्था, सुरक्षा और मजबूती के साथ निकट अंतरिक्ष का परिचालन उपयोग शामिल है. एकजुट प्रयास के तहत भारतीय सेना, नौसेना और राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर योजना बनाने और अभियान चलाने पर जोर रहेगा. उन्होंने कहा कि हवाई शक्ति का सबसे प्रभावी इस्तेमाल तभी होता है, जब उसे शुरुआत से ही संयुक्त योजना का हिस्सा बनाया जाए.

नए वायुसेना प्रमुख ने कहा कि वायुसेना के जवानों, अग्निवीरवायु, असैन्य कर्मचारियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों पर उनका विशेष ध्यान रहेगा. उनके प्रशिक्षण, पेशेवर उत्कृष्टता, मनोबल, सुरक्षा, कल्याण और सम्मान को व्यक्तिगत प्राथमिकता दी जाएगी. उन्होंने देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारतीय वायुसेना सतर्क, तैयार और दृढ़ संकल्पित है. देश को जब भी जरूरत होगी, वायुसेना अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार रहेगी. उन्होंने अपने संबोधन का समापन वायुसेना के आदर्श वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ के साथ किया.

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जीसीबी/एएस