वलसाड के 46 आदिवासी गांवों को मिलेगा सिंचाई जल, 1,331 करोड़ रुपए की दमन-गंगा परियोजना को मिली मंजूरी

गांधीनगर, 10 अक्टूबर . Gujarat Government ने वलसाड जिले के कपराडा और धरमपुर के आदिवासी तालुकों के 46 गांवों में कृषि के लिए जल उपलब्ध कराने के लिए 1,331.30 करोड़ रुपए की लिफ्ट सिंचाई परियोजना को मंजूरी दे दी है. इन गांवों में पारंपरिक नहर सिंचाई की सुविधा सीमित है.

Chief Minister भूपेंद्र पटेल ने दमन-गंगा लिफ्ट सिंचाई परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है. इस परियोजना का उद्देश्य मधुबन जलाशय से जल उठाकर पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचाकर 17,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचित करना है. सरकारी बयान के मुताबकि, परियोजना प्रारंभ होने से पहले अंतिम चरण में है.

कपराडा और धरमपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में निकटवर्ती जलाशय में पानी की उपलब्धता के बावजूद लंबे समय से जल संकट बना हुआ है. दक्षिण Gujarat के निचले तटीय मैदानों के विपरीत, जहां गुरुत्वाकर्षण-आधारित नहर नेटवर्क का लाभ मिलता है, ये ऊंचे क्षेत्र मौजूदा नहर वितरण प्रणाली से ऊपर स्थित हैं.

परिणामस्वरूप, किसान भूजल पर अत्यधिक निर्भर हैं, जिससे बहु-फसली खेती की संभावना सीमित हो गई है.

राज्य Government के नर्मदा जल संसाधन, जल आपूर्ति और कल्पसर विभाग ने उपयुक्त मार्ग की पहचान करने के लिए व्यवहार्यता अध्ययन और इंजीनियरिंग आकलन कराए.

कई विकल्पों का मूल्यांकन करने के बाद परियोजना के लिए विकल्प-3 का चयन किया गया. प्रस्तावित पाइपलाइन नेटवर्क में लगभग 53 किमी की मुख्य पाइपलाइन और 188 किमी से अधिक की शाखा और सहायक पाइपलाइन शामिल होंगी.

यह प्रणाली समुद्र तल से 65 मीटर से 382 मीटर की ऊंचाई तक जल परिवहन करेगी. इस प्रणाली में तीन पंपिंग स्टेशन होंगे, जिनमें से पहला मधुबन बांध के निकट फतेहपुरा गांव के पास सरकारी भूमि पर बनाया जाएगा.

इसके बाद बुरवाद और किस्टोनिया के पास स्थित मध्यवर्ती पंपिंग स्टेशनों के माध्यम से जल को ऊपर उठाया जाएगा. संयुक्त पंपिंग क्षमता 56,400 किलोवाट होगी, जो 75,600 हॉर्सपावर के बराबर है.

कपराडा गांव के पास स्थित ब्रेक प्रेशर टैंक अधिक ऊंचाई पर दबाव को नियंत्रित करेंगे, जिससे जल गुरुत्वाकर्षण के कारण धरमपुर की ओर निचले शाखा नेटवर्क में प्रवाहित हो सकेगा.

इस परियोजना की कुल आपूर्ति क्षमता 500 क्यूसेक होगी और यह 100 दिनों की नियोजित वार्षिक परिचालन अवधि के दौरान दो क्षेत्रों में 15 दिनों के रोटेशनल शेड्यूल पर संचालित होगी.

क्षेत्र 1 में कापराडा तालुका के 28 गांव शामिल होंगे, जिनकी अधिकतम मांग 320 क्यूसेक है, जबकि क्षेत्र 2 में कापराडा और धरमपुर के 17 गांव शामिल होंगे, जिनके लिए 180 क्यूसेक का आवंटन किया गया है.

उठाया गया पानी सीधे खेतों में बिछाई गई नहरों के माध्यम से वितरित करने के बजाय 26 गांव के तालाबों और 81 चेक डैम में छोड़ा जाएगा. इस प्रणाली से भूजल पुनर्भरण में सहायता मिलने और फसल वृद्धि के महत्वपूर्ण चरणों के दौरान पानी की उपलब्धता में सुधार होने की उम्मीद है.

बारुमल गांव के पास कांगवी नदी में 1.5 क्यूसेक पानी छोड़ने की भी योजना है. परियोजना के जलवैज्ञानिक आकलन के मुताबिक, मधुबन जलाशय पिछले कुछ वर्षों से लगभग पूरी क्षमता से भरा हुआ है और मौजूदा घरेलू या क्षेत्रीय आवंटनों को प्रभावित किए बिना प्रतिवर्ष 122.33 मिलियन घन मीटर पानी की आपूर्ति करने में सक्षम माना जाता है.

इस परियोजना में जल प्रवाह की निगरानी और पाइपलाइन के दबाव को वास्तविक समय में प्रबंधित करने के लिए एक केंद्रीय पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण (एससीडीए) प्रणाली भी शामिल होगी.

एक बार चालू हो जाने पर, इस योजना से वलसाड जिले के आदिवासी कृषि क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा में सुधार, बहु-फसली खेती को बढ़ावा मिलने और भूजल पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है.

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एएसएच/