वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अनंत विजय को मिलेगा पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान 2025

रायपुर, 1 नवंबर . वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अनंत विजय को छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग की ओर से दिए जाने वाले ‘पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान 2025’ के लिए चयनित किया गया है. उन्हें यह सम्मान 3 नवंबर 2026 को राज्योत्सव के अवसर पर आयोजित राज्य अलंकरण समारोह में प्रदान किया जाएगा.

इस संबंध में छत्तीसगढ़ शासन की ओर से अनंत विजय को औपचारिक पत्र भेजकर उनके चयन की सूचना दी गई है. पत्र में कहा गया है कि सम्मान समारोह में वह अपने साथ एक सहायक को भी ला सकेंगे. रायपुर में जनसंपर्क संचालनालय के सहायक जनसंपर्क अधिकारी कमलेश साहू को उनके एस्कॉर्ट ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया है.

अनंत विजय पिछले करीब तीन दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वर्तमान में वह देश के प्रमुख समाचारपत्र समूह दैनिक जागरण में संपादक-फीचर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के तहत स्वर्ण कमल से सम्मानित किया जा चुका है. इसके अलावा, उन्हें India Government का पत्रकारिता के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार भी मिल चुका है.

अनंत विजय अब तक 17 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं. उनकी चर्चित पुस्तक ‘मार्क्सवाद का अर्धसत्य’ ने वैकल्पिक नैरेटिव को मजबूती दी है. उनकी पुस्तक ‘अमेठी संग्राम’ भी काफी चर्चित रही और इसका अंग्रेजी सहित कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है. उनकी नई पुस्तकों में ‘हिंदी का शुक्ल पक्ष’ और ‘हिंदी के दिव्य कलाधर’ शामिल हैं.

वह पिछले 15 वर्षों से दैनिक जागरण में प्रत्येक Sunday को साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर नियमित लेखन कर रहे हैं. पिछले छह वर्षों से उनका साप्ताहिक स्तंभ नईदुनिया में भी प्रकाशित हो रहा है.

अनंत विजय फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई), पुणे की कार्य परिषद के उपाध्यक्ष हैं. पिछले वर्ष Prime Minister ने उन्हें पद्म सम्मान चयन समिति में भी नामित किया था. इसके अलावा, वह भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला के विजिटिंग फेलो रह चुके हैं.

पंडित माधव राव सप्रे के नाम पर दिया जाने वाला यह राष्ट्रीय सम्मान रचनात्मकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाता है. अनंत विजय को इस सम्मान के लिए चुना जाना पत्रकारिता, साहित्य और सांस्कृतिक लेखन के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान का सम्मान है.

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डीएससी