वकीलों की ‘रीलबाजी’ पर झारखंड हाईकोर्ट एसोसिएशन का सख्त रुख, सोशल मीडिया पर मर्यादा तोड़ी तो होगी कार्रवाई

रांची, 1 नवंबर . Jharkhand हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन ने उन अधिवक्ताओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है, जो अदालती कार्यवाही और न्यायिक प्रक्रियाओं को लेकर social media पर ‘रील’ बनाते हैं. एसोसिएशन ने इस प्रवृत्ति को वकालत के पेशे की गरिमा के प्रतिकूल करार देते हुए रील्स बनाने, बनावटी बहस के वीडियो डालने और मुवक्किलों को रिझाने के लिए social media प्रचार करने पर रोक लगाने के लिए सख्त गाइडलाइन जारी की है.

एसोसिएशन के अनुसार, हाल के दिनों में यह बात गंभीर रूप से संज्ञान में आई है कि कुछ युवा और social media प्रेमी अधिवक्ता न्याय के मंदिर कहे जाने वाले हाईकोर्ट परिसर की पृष्ठभूमि में फिल्मी गानों पर रील्स बनाकर अपलोड कर रहे हैं. इसके अलावा, अदालत कक्ष के भीतर बहस करने की बनावटी मुद्रा में फोटो खींचकर और अपनी फीस के पैकेट या दरों का विवरण सार्वजनिक कर मुवक्किलों को आकर्षित करने की शिकायतें भी मिली हैं.

एसोसिएशन ने इसे पेशेवर आचरण के खिलाफ करार दिया है. एसोसिएशन की ओर से आधिकारिक गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि इस तरह का आत्म-प्रचार अधिवक्ता अधिनियम, 1961 और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम 36 का खुला उल्लंघन है. वकालत कोई व्यवसाय या मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि समाज को न्याय दिलाने का एक बेहद पवित्र और गरिमामयी पेशा है.

इस तरह की हरकतें न केवल न्यायपालिका की मर्यादा को तार-तार करती हैं, बल्कि मुवक्किलों के बीच भी अदालत की गंभीर छवि को धूमिल करती हैं. एसोसिएशन ने सभी संबंधित सदस्यों को सख्त हिदायत दी है कि वे social media पर इस तरह के वीडियो और प्रचार सामग्री तत्काल प्रभाव से डिलीट कर दें. साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि इस आदेश की अनदेखी की गई, तो आरोपी वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा सीधे Jharkhand राज्य बार काउंसिल को की जाएगी.

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एसएनसी/एएस