‘वंदे मातरम’ विवाद अनावश्यक और शरारतपूर्ण, सरकार उठा रही गैर-जरूरी मुद्दे : पी चिदंबरम

मदुरै, 29 अगस्त . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व Union Minister पी चिदंबरम ने Saturday को ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रही बहस और उससे जुड़े कानून पर केंद्र Government की आलोचना की. उन्होंने इस विवाद को अनावश्यक और राजनीति से प्रेरित बताया.

संसद के मानसून सत्र पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पी. चिदंबरम ने कहा कि केंद्र Government ने राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर एक ऐसे मुद्दे को महत्व दिया है, जिसकी कोई वास्तविक आवश्यकता नहीं थी.

उन्होंने बताया कि मानसून सत्र के दौरान कुल 12 विधेयक पारित किए गए, जिनमें यह विधेयक भी शामिल था.

राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने वंदे मातरम को लेकर भाजपा और उसके वैचारिक पूर्ववर्ती संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदू महासभा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) या जनसंघ द्वारा वंदे मातरम गाए जाने का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जबकि उस दौर के कई दस्तावेज मौजूद हैं.

वंदे मातरम के इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह गीत तब व्यापक रूप से लोकप्रिय हुआ जब रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया और सुब्रमण्यम भारती ने दक्षिण India में इसका प्रचार किया.

उन्होंने कहा, “वंदे मातरम के पहले दो अंतरे राष्ट्र की वंदना करते हैं, जबकि बाकी चार अंतरों में हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख है. इसी कारण स्वतंत्रता से पहले इस बात को लेकर मतभेद थे कि इसका कौन-सा हिस्सा आधिकारिक रूप से गाया जाना चाहिए.”

चिदंबरम ने बताया कि इस विषय पर कांग्रेस कार्यसमिति ने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और मौलाना अबुल कलाम आजाद की उपस्थिति में विचार-विमर्श किया था.

उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया था कि केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएं, क्योंकि वे पर्याप्त हैं.

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बहुत कम Political कार्यकर्ता वंदे मातरम के दोनों स्वीकृत अंतरों को पूरी तरह गा सकते हैं, जबकि पूरे गीत के सभी अंतरे जानने वाले लोगों की संख्या और भी कम है.

उन्होंने कहा कि यदि वंदे मातरम के सभी छह अंतरे गाए जाएं तो इसमें करीब तीन मिनट लगेंगे. किसी कार्यक्रम में तमिल थाई वाझ्थु और राष्ट्रगान के साथ इसे जोड़ दिया जाए तो लोगों को लगभग पांच मिनट तक खड़ा रहना पड़ेगा.

चिदंबरम ने यह भी आरोप लगाया कि संशोधन विधेयक को दोपहर 1:30 बजे पेश किया गया और मात्र पांच मिनट में मंजूरी दे दी गई, जिससे उस पर पर्याप्त चर्चा का अवसर नहीं मिला.

उन्होंने इस विधेयक के साथ खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को भी ‘शरारतपूर्ण’ बताया.

बता दें कि इस संशोधन के जरिए राष्ट्रीय सम्मान का अपमान निवारण अधिनियम, 1971 की धारा 3 का दायरा बढ़ाकर वंदे मातरम को भी शामिल करने का प्रस्ताव है. इसके तहत जानबूझकर वंदे मातरम के गायन में बाधा डालने या इसे गाने वाली सभा में व्यवधान उत्पन्न करने पर दंड का प्रावधान किया गया है.

चिदंबरम ने कहा कि यह कदम किसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समस्या का समाधान करने के बजाय एक अनावश्यक विवाद को जन्म देता है.

एएमटी/डीकेपी