वंचित छात्रों के लिए भारतीय सेना की पहल, डोडा में शुरू की 8 सप्ताह की मुफ्त सैनिक स्कूल प्रवेश कोचिंग

डोडा, 2 नवंबर . जम्मू-कश्मीर के दूरदराज और वंचित इलाकों के छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके सपनों को पंख देने के लिए भारतीय सेना लगातार प्रयासरत है. इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के थलीला में स्थित भारतीय सेना की असम राइफल्स यूनिट ने एक सराहनीय पहल की है. सेना ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत आज से 8 सप्ताह के मुफ्त कोचिंग कार्यक्रम की शुरुआत की है.

यह कोचिंग कार्यक्रम ऑल इंडिया सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए आयोजित किया जा रहा है. इसका औपचारिक उद्घाटन 9 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडर ब्रिगेडियर विक्रांत एस. एस. शिंदे ने किया. इस अवसर पर थलीला गांव में स्थित असम राइफल्स के बटालियन मुख्यालय में बड़ी संख्या में छात्र और उनके अभिभावक मौजूद रहे.

भारतीय सेना के इस कार्यक्रम का उद्देश्य डोडा जैसे सुदूरवर्ती जिले के मेधावी लेकिन संसाधनों से वंचित छात्रों को सैनिक स्कूल जैसी प्रतिष्ठित संस्था में प्रवेश के लिए समान अवसर प्रदान करना है. अक्सर देखा जाता है कि प्रतिभा होने के बावजूद सही मार्गदर्शन और कोचिंग के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पिछड़ जाते हैं. इस खाई को पाटने के लिए सेना ने यह कदम उठाया है.

ब्रिगेडियर विक्रांत शिंदे ने इस अवसर पर बताया कि डोडा जिले के विभिन्न सरकारी और निजी स्कूलों में एक प्रारंभिक स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित किया गया था. इस टेस्ट के माध्यम से 60 मेधावी छात्रों का चयन किया गया है. इन चयनित छात्रों को अब अगले 8 सप्ताह तक विशेष कोचिंग दी जाएगी. इस कोचिंग के लिए पश्चिम बंगाल से विशेष रूप से अनुभवी और प्रशिक्षित शिक्षकों को बुलाया गया है, जो बच्चों को परीक्षा पैटर्न, सिलेबस और तैयारी की रणनीति के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन देंगे.

कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह के दौरान छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. छात्रों ने यह मंच और अवसर प्रदान करने के लिए भारतीय सेना का आभार व्यक्त किया.

एक छात्र ने से बात करते हुए कहा, “आर्मी वालों ने हमें बहुत अच्छा मौका दिया है. मेरा सपना था कि मैं सैनिक स्कूल में पढ़ूं. मेरे स्कूल में आर्मी के जवान आए, उन्होंने हमारा पेपर लिया और मैं उसमें चयनित हो गया. अब हमें फ्री कोचिंग दी जाएगी. मैं आर्मी का धन्यवाद करता हूं.”

वहीं एक छात्रा ने कहा, “मैं इंडियन आर्मी की वजह से यहां आई हूं. मैंने अपने स्कूल में सैनिक स्कूल के लिए पेपर दिया था और वहां से चयनित होकर यहां पहुंची हूं. मेरा लक्ष्य बड़ा होकर आर्मी में जाना है. अगर आर्मी ने यह अवसर नहीं दिया होता, तो शायद मैं आज यहां नहीं होती.”

एक अन्य छात्रा ने कहा कि स्कूल में बताया गया था कि एक पेपर पास करने पर नगरोटा सैनिक स्कूल में पढ़ाई का मौका मिलेगा. हमने वह पेपर दिया और पास हो गए.

इस अवसर पर ब्रिगेडियर विक्रांत शिंदे ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि यह कोचिंग सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए नहीं है, बल्कि जीवन की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए खुद को तैयार करने का पहला अनुभव है. उन्होंने कहा, “इंसानों में फर्क काबिलियत का नहीं, बल्कि अवसरों का होता है. जीवन में जब मौका मिले, तो उसे पूरी ईमानदारी और मेहनत से पकड़ना चाहिए. इस ऐतिहासिक डोडा जिले की धरती से कई लोग सेना में जाकर देश की सेवा कर चुके हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “इस बेहद जरूरी कोचिंग कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा के अंतर को कम करना है, ताकि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों को भी ऑल इंडिया सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा पास करने के समान अवसर मिल सके.”

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पीआईएम/एएस