लोकसभा सीटें 25 साल और फ्रीज करने का कांग्रेस का प्रस्ताव गलत, यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ : दलजीत चीमा

चंडीगढ़, 28 अगस्त . शिरोमणि अकाली दल के नेता दलजीत सिंह चीमा ने कांग्रेस के Lok Sabha सीटों को अगले 25 साल तक फ्रीज करने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने इसे गलत, अतार्किक और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की भावना के खिलाफ बताया.

दलजीत सिंह चीमा ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश में Lok Sabha सीटें पहले से ही लगभग 55 साल से फ्रीज हैं. 1971 में जब सीटें फ्रीज की गई थीं, तब India की आबादी केवल 54.8 करोड़ थी, जबकि आज आबादी लगभग 140 करोड़ के आसपास पहुंच गई है. ऐसे में संसदीय क्षेत्र बहुत बड़े और संभालने में मुश्किल हो गए हैं, जिससे प्रभावी प्रतिनिधित्व में दिक्कत आ रही है.

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अगले 25 साल तक और फ्रीज रखा गया तो यह संकट और गहरा हो जाएगा.

दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि परिसीमन के बाद पंजाब और दक्षिण India के उन राज्यों को नुकसान होगा जिन्होंने जनसंख्या को नियंत्रित किया है. इन राज्यों की सीटें घट सकती हैं, जबकि मध्य और उत्तर India के ज्यादा आबादी वाले राज्यों की सीटें बढ़ जाएंगी. इससे देश के संघीय संतुलन पर बुरा असर पड़ेगा.

उन्होंने कहा कि सीटों को कृत्रिम रूप से सीमित रखने से युवा पीढ़ी के लिए Political अवसर भी कम हो जाएंगे. एक और पीढ़ी तक सीटों की संख्या को रोकना युवा नेतृत्व के रास्ते बंद करने जैसा होगा. India को युवा नेतृत्व के लिए ज्यादा दरवाजे खोलने चाहिए, न कि बंद करने चाहिए.

दलजीत चीमा ने इसका समाधान भी सुझाया. उन्होंने कहा कि न तो अनिश्चितकाल तक सीटों को फ्रीज रखना सही है और न ही उन राज्यों को सजा देना सही है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है.

उन्होंने कहा कि Lok Sabha की कुल ताकत को एक समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ा दिया जाए और फिर परिसीमन किया जाए, जिसमें सभी राज्यों की सीटें एक समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ाई जाएं. इससे प्रतिनिधित्व बेहतर होगा, बढ़ती आबादी को जगह मिलेगी, युवा नेताओं के लिए ज्यादा मौके बनेंगे और देश का संघीय संतुलन भी बना रहेगा.

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