लिथियम-निकेल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट का बड़ा फैसला; 2,814 करोड़ रुपए की योजना को दी मंजूरी

New Delhi, 4 नवंबर . Prime Minister Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Wednesday को ‘कैपेक्स सपोर्ट स्कीम टू प्रमोट क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग’ को मंजूरी दे दी. अगले 5 वर्षों के लिए लागू इस स्कीम पर 2,814 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे, जिसका उद्देश्य देश में लिथियम और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करना, आयात पर निर्भरता कम करना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बैटरी स्टोरेज तथा रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए मजबूत आपूर्ति शृंखला तैयार करना है.

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस योजना के तहत देश में चार महत्वपूर्ण खनिज प्रोसेसिंग संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें दो लिथियम प्रोसेसिंग प्लांट होंगे, जिनकी न्यूनतम क्षमता 30 किलो टन होगी, जबकि दो निकेल प्रोसेसिंग प्लांट कम से कम 50 किलो टन क्षमता के होंगे. निकेल प्रोसेसिंग के दौरान कोबाल्ट का उत्पादन सह-उत्पाद के रूप में भी होगा.

Government का उद्देश्य लिथियम और निकेल अयस्कों तथा इंटरमीडिएट उत्पादों को उच्च शुद्धता वाले रसायनों में बदलने की घरेलू क्षमता विकसित करना है, ताकि India वैश्विक मूल्य शृंखला में अधिक मूल्यवर्धन कर सके.

योजना के तहत पात्र निवेश पर 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी. लिथियम परियोजनाओं के लिए अधिकतम 500 करोड़ रुपए और निकेल परियोजनाओं के लिए अधिकतम 900 करोड़ रुपए तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.

योजना के तहत, लाभार्थियों का चयन दो चरणों में होगा. पहले चरण में तकनीकी योग्यता का आकलन किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में वित्तीय बोली प्रक्रिया होगी. सबसे कम पूंजीगत सहायता मांगने वाले योग्य आवेदकों का चयन किया जाएगा. प्रोत्साहन राशि परियोजना के विभिन्न चरणों की उपलब्धियों के आधार पर तीन किस्तों में जारी की जाएगी.

Government का कहना है कि वर्तमान समय में लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों तक सीमित है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन भू-Political तनाव, मूल्य अस्थिरता और आपूर्ति बाधाओं के प्रति संवेदनशील बनी रहती है. India अभी भी उच्च शुद्धता वाले लिथियम और निकेल इंटरमीडिएट्स के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. ऐसे में घरेलू प्रोसेसिंग क्षमता विकसित करना आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जरूरी माना गया है.

Government का मानना है कि इस योजना से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस), इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा विनिर्माण और स्पेशियलिटी स्टील जैसे क्षेत्रों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा. वर्तमान में इन क्षेत्रों की आपूर्ति शृंखला आयातित कच्चे माल और प्रोसेस्ड खनिजों पर निर्भर है.

India में लिथियम और निकेल प्रोसेसिंग क्षमता विकसित होने से बैटरी निर्माण उद्योग को मजबूती मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की लागत प्रतिस्पर्धा भी बेहतर होगी.

Government के मुताबिक, यह योजना आत्मनिर्भर India अभियान के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इससे देश में एंड-टू-एंड क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन विकसित होगी, आयात निर्भरता कम होगी और वैश्विक आपूर्ति बाधाओं का प्रभाव कम होगा.

–

डीबीपी