
New Delhi, 26 अक्टूबर . कई दिनों की लगातार गिरावट के बाद हफ्ते के पहले कारोबारी दिन Monday को सोने और चांदी की कीमतों में रिकवरी देखने को मिली. पिछले सप्ताह सोना और चांदी दोनों तेज दबाव में रहे थे, लेकिन कारोबारी सप्ताह के पहले दिन अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में खरीदारी लौटने से दोनों कीमती धातुओं के भाव में तेजी दर्ज की गई. हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह फिलहाल तकनीकी रिकवरी है और निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक और अमेरिका के पीसीई मुद्रास्फीति आंकड़ों पर बनी हुई है.
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का दिसंबर वायदा भाव करीब 0.50 प्रतिशत यानी 761 रुपए चढ़कर 1,42,733 रुपए प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया. वहीं चांदी का दिसंबर वायदा भाव 0.49 प्रतिशत यानी 968 रुपए की तेजी के साथ 1,96,687 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया.
वहीं दिन के कारोबार में सोना एक समय अपने पिछले बंद भाव 1,42,024 रुपए से 864 रुपए यानी 0.60 प्रतिशत उछलकर 1,42,888 रुपए प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था, तो वहीं चांदी एक समय अपने पिछले बंद 1,95,719 रुपए से 1,467 रुपए यानी 0.74 प्रतिशत उछलकर 1,97,186 रुपए के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी.
पिछले सप्ताह सोना करीब 4 प्रतिशत और चांदी 7 प्रतिशत से अधिक टूट गई थी, ऐसे में निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी दिखाई.
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर भी सोना और चांदी दोनों में सुधार देखा गया. Monday सुबह के कारोबार में सोना 0.48 प्रतिशत चढ़कर 4,027 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखाई दिया, हालांकि इसने 0.50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त के साथ 4,032.90 डॉलर प्रति औंस का उच्चतम स्तर छुआ.
वहीं, सुबह के कारोबार में चांदी 0.74 प्रतिशत की बढ़त के साथ 54.35 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करती नजर आई. हालांकि कारोबारी सत्र में इसने 0.90 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी के साथ 54.47 डॉलर प्रति औंस का उच्चतम स्तर छुआ.
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह स्पॉट गोल्ड पहली बार जुलाई के बाद 4,000 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गया था, जिससे बाजार में भारी दबाव बन गया था.
विश्लेषकों के अनुसार, 4,000 डॉलर का स्तर सोने के लिए एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र साबित हो रहा है. हालिया गिरावट के बाद इस स्तर पर खरीदारी लौटने से कीमतों को सहारा मिला है. हालांकि अभी भी बाजार में सावधानी बनी हुई है क्योंकि ऊंची ऊर्जा कीमतें महंगाई संबंधी चिंताओं को बढ़ा रही हैं.
बाजार की सबसे बड़ी नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर है. विशेषज्ञों के अनुमानों के मुताबिक, अक्टूबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना सीमित है, लेकिन दिसंबर में दर बढ़ोतरी की आशंका अभी भी बनी हुई है. यही वजह है कि सोने और चांदी में बड़े निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं.
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इस सप्ताह जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़े बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे. यदि महंगाई उम्मीद से अधिक रहती है तो ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने की संभावना बढ़ सकती है, जो सोने और चांदी के लिए नकारात्मक संकेत माना जाएगा.
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, चांदी ने सोने की तुलना में बेहतर रिकवरी दिखायी है. कॉमेक्स और एमसीएक्स दोनों में चांदी के भाव में अपेक्षाकृत अधिक तेजी दर्ज की गई. इसके बावजूद तकनीकी संकेत बताते हैं कि चांदी अभी भी ओवरसोल्ड जोन से पूरी तरह बाहर नहीं निकली है.
एमसीएक्स पर चांदी के लिए 2 लाख रुपए से 2.02 लाख प्रति किलोग्राम का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) माना जा रहा है, जबकि नीचे की ओर 1.92 लाख रुपए से 1.94 लाख का क्षेत्र मजबूत समर्थन के रूप में देखा जा रहा है.
इस बीच, कच्चे तेल की चाल भी कीमती धातुओं पर असर डाल सकती है. ब्रेंट क्रूड हाल के दिनों में 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया था. ऊंचे तेल दाम महंगाई बढ़ाने का जोखिम पैदा करते हैं, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल सकते हैं. यही कारण है कि ऊर्जा बाजार, डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड पर निवेशकों की नजर बनी हुई है.
–
डीबीपी
Skip to content