लखनऊ: ‘अपनी जनता पार्टी’ का प्रदर्शन, ‘एक देश, एक शिक्षा’ व्यवस्था लागू करने की मांग

Lucknow, 15 सितंबर . Lucknow के परिवर्तन चौक पर Tuesday को अपनी जनता पार्टी (एजेपी) के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने शिक्षा व्यवस्था, यूजीसी नियमावली और आरक्षण समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने ‘एक देश, एक शिक्षा’ व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठाई. प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने समान शिक्षा प्रणाली, उच्च शिक्षा संस्थानों में कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के अधिकारों और आरक्षण को लेकर अपनी बात रखी.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था आर्थिक और सामाजिक आधार पर अलग-अलग स्तरों में बंटी हुई है. उनकी मांग है कि गरीब और अमीर परिवारों के बच्चों को समान शिक्षा उपलब्ध कराई जाए और कम से कम कक्षा 12 तक पूरे देश में समान पाठ्यक्रम लागू किया जाए.

एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में जाति और आर्थिक स्थिति के आधार पर अंतर पैदा नहीं होना चाहिए. सरकारी और निजी स्कूलों के बीच मौजूद अंतर को कम करने के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें हर बच्चे को समान अवसर मिले. जब देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की चर्चा हो सकती है तो ‘वन नेशन, वन एजुकेशन’ पर गंभीरता से विचार क्यों नहीं किया जा सकता. देश के सभी बच्चों के लिए शिक्षा की एक समान और गुणवत्तापूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए.

एक अन्य प्रदर्शनकारी ने भी सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जहां किसी अधिकारी, कर्मचारी, कारोबारी या आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चे के लिए शिक्षा के अवसर अलग-अलग न हों.

उन्होंने कहा कि यदि एक आईएएस अधिकारी या कारोबारी का बच्चा सरकारी विद्यालय में पढ़ सकता है तो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार के बच्चे को भी अच्छे सरकारी स्कूल में पढ़ने का समान अधिकार होना चाहिए. उनका उद्देश्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था की मांग करना है जिसमें सामाजिक और आर्थिक स्थिति के आधार पर बच्चों के बीच भेदभाव न हो.

प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से संबंधित नियमावली को लागू करने की भी मांग की. उन्होंने दावा किया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के विद्यार्थियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षण संस्थानों में मानसिक प्रताड़ना और भेदभाव का सामना करना पड़ता है. ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए यूजीसी की 2026 की नियमावली को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए. उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए मजबूत और प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी भी छात्र को भेदभाव या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े.

प्रदर्शन के दौरान आरक्षण के मुद्दे पर भी प्रदर्शनकारियों ने Government पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी की ओर से दी गई ‘भीख’ नहीं है, बल्कि संविधान में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े तथा वंचित वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की व्यवस्था है. नौकरियों और Political प्रतिनिधित्व में समान अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आरक्षण की व्यवस्था की गई थी. मौजूदा Government आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रही है.

उन्होंने दावा किया कि आरक्षण के मुद्दे को लेकर Government की नीतियों का विरोध जारी रहेगा और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता इसका जवाब देगी. प्रदर्शनकारियों ने अपनी जनता पार्टी की Government बनने का भी दावा किया.

प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी से जुड़े मुद्दे को जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ाई से जोड़ते हुए Government पर गंभीर आरोप लगाए. एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यूजीसी से संबंधित प्रावधानों को लागू करना उच्च शिक्षा में भेदभाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब संगठन और उसके समर्थक इन मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हैं तो Government की ओर से बल प्रयोग, गिरफ्तारी और मुकदमे दर्ज किए जाते हैं. प्रदर्शनकारी ने Government की कार्रवाई को कठोर बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले लोगों को अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए.