रोहित शर्मा ने बताई ‘जर्सी नंबर 45’ चुनने के पीछे की कहानी, मां से ली थी सलाह

Mumbai , 30 अक्टूबर . भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रोहित शर्मा ने अपनी मशहूर नंबर 45 जर्सी के पीछे की कहानी साझा की है. उन्होंने बताया कि यह नंबर उनके लिए बहुत खास है और समय के साथ उनकी पहचान बन गया है. रोहित ने अपने गेमिंग रियलिटी शो ‘फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा’ में बताया कि जर्सी नंबर चुनने के पीछे एक खास कारण था.

इस कहानी में उनके क्रिकेट करियर की शुरुआती यादें, उनकी मां के साथ हुई बातचीत और एक ऐसा नंबर शामिल है जो उन्हें बिल्कुल सही लगा. शो के दौरान बातचीत करते हुए, Actor राहुल लोहानी ने रोहित से नंबर 45 के महत्व के बारे में पूछा, “सर, नंबर 45 की जर्सी देखते या सुनते ही लोगों को समझ आ जाता है कि ‘हिटमैन’ आ गए हैं, लेकिन सर, आपने नंबर 45 ही क्यों चुना?”

अपनी पसंद के पीछे की कहानी बताते हुए रोहित ने कहा, “इसके पीछे बहुत ही साधारण सा लॉजिक था. जब मैंने पहली बार क्रिकेट खेलते हुए जर्सी पहनी, तो मुझे एक नंबर चुनना था. बाकी लोगों ने पहले ही नंबर 5, 8 और 9 जैसे नंबर चुन लिए थे. मैं कोई सिंगल-डिजिट नंबर (एक अंक वाला नंबर) चाहता था, लेकिन वह सब पहले ही चुने जा चुके थे. इसी कारण मेरे पास सिर्फ नंबर 19 बचा था. मुझे नंबर 19 पसंद भी था, इसलिए मैंने उसे ले लिया और अंडर-19 में उसी नंबर के साथ खेला.”

हालांकि, रोहित को एहसास हुआ कि अगर वह आगे चलकर भारतीय टीम के लिए खेलते हैं, तो उन्हें अपने नंबर के बारे में फिर से सोचना होगा. उन्होंने बताया, “उस समय हम शायद साथ खेल रहे थे – मुझे अभी नाम याद नहीं आ रहा – उन्होंने मुझसे कहा, ‘अरे भाई, यह तो अंडर-19 है. जब तुम भारतीय टीम में खेलोगे, तो यह नंबर नहीं ले पाओगे.’ मैंने पूछा, ‘क्यों?’ तो उन्होंने बताया, ‘यह राहुल द्रविड़ का नंबर है.’ उस समय राहुल द्रविड़ नंबर 19 की जर्सी पहनते थे और वह टीम के कप्तान भी थे.”

इसके बाद रोहित ने अपनी मां से सलाह ली. उन्होंने बताया, “उसके ठीक बाद शाम को मैं होटल पहुंचा और मां को फोन किया. मैंने उनसे कहा, ‘मां, मैं इस नंबर के साथ नहीं खेल सकता. अब आप ही बताइए कि मुझे किस नंबर के साथ खेलना चाहिए?’ तब मां ने मेरे लिए ’45’ नंबर चुना.”

उन्होंने आगे कहा, “मां ने मुझसे कहा, ‘9 नंबर के साथ खेलो, यह तुम्हारे लिए अच्छा रहेगा.’ 9 नंबर तो पहले ही जा चुका था, और मैं 27 नंबर के साथ खेलना नहीं चाहता था. मुझे 4 और 5 का साथ अच्छा लग रहा था. मैंने मां को बताया कि 4-5 का कॉम्बिनेशन काफी बेहतर लग रहा है, इसलिए मैंने कहा, ‘मां, मैं यही नंबर लूंगा. यह भी 9 ही बनता है, और जर्सी पर 4-5 नंबर काफी अच्छा लगेगा.’”

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एसएम/डीकेपी