रोज 5 मिनट करें अर्ध उष्ट्रासन, गर्दन-कमर दर्द और कब्ज से मिलेगा छुटकारा

New Delhi, 4 नवंबर . आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम घंटों लैपटॉप और मोबाइल पर काम करते हैं, जिससे हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर काफी दुष्प्रभाव पड़ता है. ऐसे में योग ही एक ऐसा उपाय है जो शरीर को स्ट्रेच करने के साथ-साथ मन को भी शांत करता है. कई योगासनों में एक बेहद असरदार और आसान आसन है- अर्ध उष्ट्रासन.

उष्ट्र’ का अर्थ होता है ‘ऊंट’ और अर्ध का अर्थ होता है ‘आधा’. इस आसन को करते समय शरीर की आकृति आधे झुके हुए ऊंट के समान बनती है, इसलिए इसे अर्ध उष्ट्रासन कहा जाता है. देखने में सरल इस आसन को करने से बहुत लाभ मिलते हैं.

India Government के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को करने के फायदे बताए हैं. उनके अनुसार, यह आसन ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, जिससे शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त खून और ऑक्सीजन मिलती है और शरीर तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करता है.

यह न सिर्फ रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, बल्कि सीने को खोलकर सांस लेने की क्षमता को भी बेहतर बनाता है.

इसके अलावा, अर्ध उष्ट्रासन कब्ज और कमर दर्द से राहत देने में भी मददगार है. जब हम इस आसन का नियमित अभ्यास करते हैं, तो पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है. इससे कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती हैं और पेट हल्का महसूस होता है. इस योगासन से मानसिक तनाव भी कम होता है. जब शरीर ठीक रहता है तो हमारा मन भी खुश और शांत रहता है.

अर्ध उष्ट्रासन के नियमित अभ्यास से पीठ और गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती हैं. इस आसन को करने के दौरान रीढ़ की हड्डी पीछे की तरफ स्ट्रेच होती है. इससे रीढ़ के आसपास की छोटी-बड़ी सभी मांसपेशियों में खिंचाव आता है और उनमें ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है. रोजाना अभ्यास से ये मांसपेशियां लचीली और मजबूत बनती हैं, जिससे कमर दर्द और जकड़न से राहत मिलती है और पोस्चर में सुधार होता है.

आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अगर आपको कमर या घुटनों में कोई तकलीफ है तो बिना डॉक्टर से सलाह लिए इस आसन को न करें.

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एनएस/एएस