रोज करें चक्रासन का अभ्यास, जानें करने का सही तरीका और फायदे

New Delhi, 14 सितंबर . योग भारतीय संस्कृति की प्राचीन धरोधर है, जो मन और आत्मा को संतुलित रखने का मार्ग दिखाता है. योग के अनेक आसनों में चक्रासन एक महत्वपूर्ण आसन है, जो न केवल शरीर को लचीला बनाता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है.

‘चक्र’ का अर्थ है पहिया और ‘आसन’ का अर्थ है मुद्रा. इस आसन में शरीर को पीछे की ओर मोड़कर पहिए जैसा आकार दिया जाता है. यह पीठ, हाथ, पैर और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करता है, साथ ही शरीर की लचीलापन और मुद्रा में सुधार करता है. योग विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अभ्यास से यह आसन कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है.

India Government के आयुष मंत्रालय के अनुसार, चक्रासन से कमर-रीढ़ की समस्याएं दूर होती हैं, आंखों की रोशनी बढ़ती है, कब्ज से राहत मिलती है, और तनाव-चिंता कम होती है. यह मानसिक तनाव और चिंता को कम कर शांति देने में भी मददगार है. यह मांसपेशियों को मजबूत कर शरीर की सक्रियता बढ़ाता है.

इसके अभ्यास के लिए सबसे पहले पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं. अपने पैरों को घुटनों से मोड़ें और पैरों को कूल्हों के पास लाएं.

दोनों हाथों को सिर के पास ले जाएं, हथेलियां जमीन पर और उंगलियां कंधों की ओर हों. इसके बाद सांस लेते हुए हथेलियों और पैरों पर जोर देकर शरीर को ऊपर उठाएं. सिर को आराम से पीछे की ओर लटकाएं. 10 से 20 सेकंड तक इस मुद्रा में बने रहना चाहिए और सामान्य रूप से सांस भी लेते रहना चाहिए. इसके बाद धीरे-धीरे स्थिति में वापस आना चाहिए.

नियमित चक्रासन से न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है. चक्रासन न सिर्फ रीढ़ की मज़बूती बढ़ाता है, बल्कि पूरे शरीर को ऊर्जावान बनाता है. रोजाना 5-10 मिनट का अभ्यास कमर दर्द को काफी हद तक नियंत्रित कर सकता है. अगर कोई भी अभ्यासकर्ता बैठे रहने की वजह से जकड़न महसूस कर रहे हैं, तो उन्हें अपनी दिनचर्या में चक्रासन शामिल करें.

एनएस/पीएम