
New Delhi, 12 अक्टूबर . आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को स्वस्थ और तनावमुक्त रखने के लिए योग करना एक अच्छा विकल्प है. योग के विभिन्न आसनों में गोमुखासन शरीर को लचीला और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करता है.
गोमुखासन नाम दो शब्दों से मिलकर बना है- ‘गो’ यानी गाय और ‘मुख’ यानी मुंह. इस आसन को करते समय शरीर की आकृति गाय के मुंह के समान दिखती है, इसलिए इसे गोमुखासन कहा जाता है. इस आसन को नियमित रूप से करने से कंधों, छाती और पीठ के ऊपरी हिस्से में खिंचाव मसूस होता है. इस आसन में शरीर की मुद्रा गायक के मुख जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे गोमुखासन कहा जाता है.
आयुष मंत्रालय के अनुसार, गोमुखासन बैठकर किए जाने वाले महत्वपूर्ण आसनों में से एक है, जो आसन छाती और कंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. दरअसल, इस आसन को करने के दौरान हाथों को पीठ के पीछे ले जाकर आपस में बांधा जाता है और छाती को आगे की ओर खोला जाता है. इस प्रक्रिया से छाती के हिस्से में खिंचाव आता है और छाती पूरी तरह से खुल जाती है. छाती खुलने से फेफड़ों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. फेफड़ों को फैलने और सिकुड़ने के लिए ज्यादा जगह मिलती है, जिससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है. यही कारण है कि यह आसन सांस से जुड़ी समस्याओं में काफी मददगार है.
नियमित रूप से गोमुखासन का अभ्यास करने से अस्थमा, सांस फूलना और छाती में जकड़न जैसी परेशानियों में आराम मिलता है. इसके अलावा यह आसन कंधों और गर्दन की अकड़न को दूर करता है, पीठ को मजबूत बनाता है और शरीर के पोस्चर को भी सुधारता है.
यदि शुरुआत में पीठ के पीछे दोनों हाथ आपस में न मिलें, तो जबरदस्ती न करें. इसकी जगह आप किसी योग स्ट्रैप या रूमाल का सहारा ले सकते हैं. किसी भी व्यक्ति के घुटनों, कूल्हों, कंधों, कलाई या गर्दन में गंभीर दर्द या चोट है, तो यह आसन न करें.
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एनएस/पीएम
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