
New Delhi, 29 सितंबर . तेलंगाना के Chief Minister रेवंत रेड्डी के एक बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है. उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि भाजपा नेता बार-बार ‘जय श्री राम’ का नारा तो लगाते हैं, लेकिन ‘हर हर महादेव’ का नारा क्यों नहीं लगाते. इस दौरान उन्होंने भगवान शिव को गरीबों का देवता और भगवान राम को अमीरों का देवता बताया. उनके इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया है और भाजपा समेत कई दलों के नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.
रेवंत रेड्डी के बयान पर बिहार Government के मंत्री रामकृपाल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. Patna में से उन्होंने कहा, “भगवान एक ही हैं. रेवंत रेड्डी आप बंटवारा क्यों कर रहे हैं? वहां ऐसे बंटवारे काम नहीं आएंगे. बंटवारा करके आप राज्य को बर्बाद कर रहे हैं. अब आग में घी मत डालिए. भगवान एक ही हैं, चाहे वह शंकर, राम या कृष्ण के रूप में हों. हमारे यहां करोड़ों देवी-देवता हैं जिनकी हम सब पूजा करते हैं, चाहे वह दुर्गा, सरस्वती या लक्ष्मी के रूप में हों.”
जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने भी रेवंत रेड्डी के बयान की आलोचना की. उन्होंने कहा, “कुछ लोग जाति और धर्म के आधार पर भगवान को भी बांटने की कोशिश कर रहे हैं. बाबासाहेब आंबेडकर ने इसी बात का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि हमें जाति के बारे में नहीं बल्कि समाज के बारे में बात करनी चाहिए. कई बातों को समझने के बाद ही उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया था. उन्होंने कहा था कि बौद्ध धर्म में ज्ञान, समानता और लोगों के बीच प्रेम है. बौद्ध धर्म और बुद्ध की शिक्षाओं में कोई जाति, धर्म, वर्ग या वर्ण नहीं है.”
Samajwadi Party ने भी रेवंत रेड्डी के बयान पर आपत्ति जताई. सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने Lucknow में कहा, “मुझे लगता है कि आप एक राज्य के Chief Minister हैं. आपको भगवान से जुड़े मामलों में नहीं पड़ना चाहिए. संविधान से मिली शक्तियों का इस्तेमाल गरीबों, पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और शोषित लोगों के लिए काम करने में कीजिए. भगवान से जुड़े मामले और कौन सा भगवान बड़ा या छोटा है, यह संतों, ऋषियों और आध्यात्मिक गुरुओं पर छोड़ देना चाहिए.”
वहीं, इस मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा, “भगवान शिव को देवों का देव महादेव कहा जाता है. यह धर्म और आध्यात्मिकता का मामला है. यह समाज का भी मामला है, जिसे भाजपा के वे लोग नहीं समझ पाएंगे जो वोट चोरी करते हैं और धर्म के नाम पर वोट मांगते हैं.”
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पीआईएम/पीएम
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