
Mumbai , 7 अक्टूबर . भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी से होम लोन ग्राहकों और छोटे कारोबारों के लिए कर्ज लेना महंगा होने की उम्मीद है. शीर्ष बैंकरों और अर्थशास्त्रियों ने Wednesday को कहा कि इस कदम का उद्देश्य अर्थव्यवस्था की मजबूत विकास गति को प्रभावित किए बिना महंगाई के दबाव को नियंत्रित करना है.
इंडियन ओवरसीज बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि ऊंची ब्याज दरों का असर स्वाभाविक रूप से कर्ज लेने वालों खासकर होम लोन ग्राहकों और छोटे कारोबारों पर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि बैंकों को ऊंची ब्याज दरों के असर को ग्राहकों तक पहुंचाने और उत्पादक कर्ज की मांग को लगातार समर्थन देने के बीच संतुलन बनाना होगा.
श्रीवास्तव ने आरबीआई द्वारा रेपो रेट को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने के फैसले को “संतुलित और पूर्व-सावधानी वाला कदम” बताया.
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने ऊर्जा कीमतों, कमजोर मानसून और अल नीनो की स्थिति से जुड़े आपूर्ति-पक्ष के दबाव के बीच बढ़ते महंगाई जोखिमों को देखते हुए यह कदम उठाया है.
उन्होंने कहा, “ऊंची ब्याज दरों का असर स्वाभाविक रूप से कर्ज लेने वालों खासकर होम लोन ग्राहकों और छोटे कारोबारों पर पड़ेगा. बैंकों को ऊंची ब्याज दरों के असर को कर्ज लेने वालों तक पहुंचाने और साथ ही उत्पादक कर्ज की मांग को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाना होगा.”
एचडीएफसी बैंक की प्रमुख अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता ने कहा कि आरबीआई ने प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंकों के अनुरूप ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र शुरू किया है. ताजा फैसला घरेलू स्तर पर बढ़ते महंगाई जोखिमों के बीच लिया गया है, जबकि आर्थिक विकास की गति मजबूत बनी हुई है.
गुप्ता ने कहा, “यह फैसला घरेलू महंगाई के बढ़ते जोखिमों के बीच लिया गया है, जबकि विकास की गति मजबूत बनी हुई है. मौद्रिक नीति के रुख में ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी चरणबद्ध सख्ती की ओर बदलाव संकेत देता है कि आज की दर वृद्धि किसी एक बार के कदम के बजाय ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चक्र की शुरुआत है.”
उन्होंने कहा कि आरबीआई का रुख और संशोधित व्यापक आर्थिक अनुमान सख्ती की ओर झुके हुए हैं. विकास दर का अनुमान 40 आधार अंक बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया गया है.
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने भी 25 आधार अंकों की रेपो रेट बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह महंगाई संबंधी चिंताओं को बताया. उन्हें चालू वर्ष के दौरान 50 आधार अंकों की और सख्ती की उम्मीद है. उनके अनुसार, दिसंबर में एक और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसके बाद फरवरी में एक और वृद्धि संभव है.
सबनवीस ने कहा, “इस नीति का दिलचस्प पहलू यह है कि आरबीआई ने किसी विशेष लिक्विडिटी उपाय की घोषणा नहीं की है. यह संकेत देता है कि वीआरआरआर के जरिए लिक्विडिटी को चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित करने का मौजूदा तरीका जारी रहेगा.”
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एबीएस
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