
New Delhi, 19 अक्टूबर . रोजाना योगासन करने से शरीर और मन के बीच संतुलन बना रहता है, परिघासन उन्हीं में से एक है. यह आसन शरीर के साइड बॉडी को गहराई से स्ट्रेच करता है, जिससे रीढ़ लचीली बनती है, कमर की जकड़न दूर होती है और सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है.
संस्कृत में ‘परिघा’ का अर्थ द्वार को बंद करने वाली लोहे की छड़ या बीम होता है और ‘आसन’ का अर्थ मुद्रा है, इसलिए इसे ‘गेट पोज’ भी कहा जाता है. इस आसन में शरीर की स्थिति भी उसी तरह मजबूत और स्थिर बनती है. यह घुटनों के बल किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण योगासन है, जिसमें शरीर का आकार एक गेट (दरवाजे) के समान प्रतीत होता है.
आयुष मंत्रालय के अनुसार, परिघासन शरीर के संतुलन, लचीलेपन और फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण पार्श्व-झुकाव वाला योगासन है. इससे कमर की साइड की मांसपेशियों, हैमस्ट्रिंग, काफ मसल्स और पेल्विक क्षेत्र में बेहतरीन खिंचाव आता है. यह रीढ़ की हड्डी, पसलियों, और कूल्हों को एक गहरा पार्श्व खिंचाव देता है, जिससे पीठ और कमर की जकड़न दूर होती है. साथ ही, यह छाती और पसलियों के बीच की मांसपेशियों के खुलने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और गहरी सांस लेने में मदद मिलती है.
जब हम इस आसन में शरीर को साइड में स्ट्रेच करते हैं, तो पेट के अंदरूनी अंगों पर एक तरह का कोमल दबाव और खिंचाव आता है, जिसे ही योग में मालिश कहा जाता है. इस आसन में पेट के निचले हिस्से पर आने वाला दबाव कोलन को स्टिम्युलेट करता है, जिससे मल का संचलन आसान होता है. साथ ही यह आसन वात दोष को संतुलित करता है, जो आयुर्वेद के अनुसार कब्ज का मुख्य कारण है. रोज सुबह खाली पेट 3 से 5 बार इसका अभ्यास करने से इन समस्याओं में धीरे-धीरे काफी राहत मिलती है.
जिन लोगों के घुटने कमजोर हैं या घुटनों में दर्द है, उन्हें घुटने के नीचे मुड़ा हुआ कंबल या योगा मैट पैडिंग का उपयोग करना चाहिए अथवा गंभीर दर्द में इसे करने से बचना चाहिए. गर्भवती महिलाओं को यह तीव्र पार्श्व खिंचाव वाला आसन करने की सलाह नहीं दी जाती है.
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एनएस/पीएम
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