
Mumbai , 22 अक्टूबर . भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) देश में रीट यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (आरईआईटी) और इनविट यानी इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आईएनवीआईटी) के दायरे को और व्यापक बनाने की दिशा में काम कर रहा है. सेबी की कार्यकारी निदेशक मनिंदर चीमा ने Thursday को कहा कि ये दोनों निवेश साधन भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था में कहीं अधिक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं और खुदरा निवेशकों को नियमित आय देने वाले महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर सकते हैं.
सेबी की कार्यकारी निदेशक ने आरईआईटी और इनवीआईटी की विकास क्षमता पर न्यूज एजेंसी से बात करते हुए कहा कि ये India की जीडीपी के 1.5 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत तक पहुंच सकते हैं. साथ ही उन्होंने प्रस्तावित कॉर्पोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन पायलट, निवेशक संरक्षण और टोकनाइज्ड वित्तीय परिसंपत्तियों के लिए एक व्यापक रोडमैप पर भी बात की.
मनिंदर चीमा ने न्यूज एजेंसी से बात करते हुए आगे कहा कि आरईआईटी और इनविट तेजी से बढ़ता हुआ एसेट क्लास हैं, जो निवेशकों को रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश का अवसर प्रदान करते हैं.
उन्होंने बताया कि इन निवेश साधनों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इनके लिए उत्पन्न नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) का 90 प्रतिशत निवेशकों को वितरित करना अनिवार्य होता है. इससे निवेशकों को नियमित आय प्राप्त होती है और यह इन्हें आकर्षक यील्ड आधारित निवेश विकल्प बनाता है.
उन्होंने कहा, “सेबी आरईआईटी और आईएनवीआईटी को केवल प्रायोजक समूहों की परिसंपत्तियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें तीसरे पक्ष की परिसंपत्तियां खरीदने की अनुमति देने पर भी विचार कर रहा है. इस प्रस्ताव पर परामर्श प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है.”
यदि यह ढांचा लागू होता है तो आरईआईटी और आईएनवीआईटी के लिए उपलब्ध परियोजनाओं और परिसंपत्तियों का दायरा काफी बढ़ जाएगा. इससे इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट क्षेत्र में एसेट मोनेटाइजेशन को नई गति मिल सकती है और निवेशकों के लिए भी अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे.
मनिंदर चीमा ने कहा, “सेबी Government के साथ मिलकर सार्वजनिक परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग और मोनेटाइजेशन पर भी काम कर रहा है. विशेष रूप से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसयू) के पास मौजूद बड़ी भूमि संपत्तियों को आर्थिक गतिविधियों में लाने पर विचार किया जा रहा है.”
उन्होंने आगे कहा, “देश में कई ऐसी परिसंपत्तियां हैं जिनका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है और उन्हें उत्पादक आर्थिक संसाधनों में बदलने के लिए नीतिगत सहयोग आवश्यक है. Government की प्राथमिकताओं में भी सार्वजनिक परिसंपत्तियों का मोनेटाइजेशन प्रमुख रूप से शामिल है.”
सेबी वित्तीय बाजारों के डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाने के लिए डिमैट 2.0 के दूसरे चरण पर भी काम कर रहा है. इसके तहत भविष्य में टोकनाइज्ड बॉन्ड ट्रेडिंग की सुविधा शुरू की जा सकती है.
मनिंदर चीमा ने कहा कि फिलहाल कॉरपोरेट बॉन्ड टोकनाइजेशन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि अपेक्षाकृत कम लिक्विडिटी वाले एसेट्स टोकनाइजेशन के लिए अधिक उपयुक्त हैं, क्योंकि इस तकनीक से डिलीवरी वर्सेस पेमेंट (डीवीपी) जैसे लेन-देन अधिक कुशल और सुरक्षित बनाए जा सकते हैं.
उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट बॉन्ड्स के साथ शुरू होने वाला यह प्रयोग भविष्य में अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों के लिए भी रास्ता खोल सकता है. हालांकि, डिमैट 2.0 के अगले चरण के लिए अभी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है.
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डीबीपी
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