रिपोर्ट: तानाशाही खत्म करने में सफल, लोकतंत्र मजबूत करने में पिछड़ा बांग्लादेश

ढाका, 5 अक्टूबर . बांग्लादेश का जन्म Pakistan की क्रूर सैन्य तानाशाही के खिलाफ हुए विद्रोह से हुआ था. स्थानीय मीडिया ने एक बांग्लादेशी पत्रकार के हवाले से बताया है कि तानाशाही Governmentों को गिराने की साबित हो चुकी काबिलियत के बावजूद, देश एक टिकाऊ लोकतंत्र बनाने में संघर्ष करता रहा है.

ढाका स्थित ‘सेंटर फॉर गवर्नेंस स्टडीज’ द्वारा आयोजित ‘बे ऑफ बंगाल कन्वर्सेशन’ कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ‘द डेली स्टार’ के संपादक और प्रकाशक महफूज अनाम ने कहा कि हम तानाशाही को खत्म करने में तो बहुत अच्छे हैं, लेकिन दुखद सच्चाई यह है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं बनाने में हम बहुत कमजोर हैं.

अनाम ने कहा कि तानाशाही को खत्म करते समय देश एकजुट हो जाता है. लेकिन, एक बार जब तानाशाही खत्म हो जाती है, तो देश बंट जाता है.

‘द डेली स्टार’ ने उनके हवाले से कहा कि जो समूह तानाशाही को खत्म करने के लिए मिलकर काम करते हैं, वे ही बाद में एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं. हमें सच में नहीं पता कि लोगों को उनकी पूरी ऊर्जा, नए विचारों और हिम्मत के साथ कैसे एक साथ लाया जाए और उस संसाधन को देश की ताकत में कैसे बदला जाए.”

बांग्लादेश के Political इतिहास को याद करते हुए अनाम ने कहा कि बांग्लादेशी सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद के पतन और 1991 में लोकतंत्र की वापसी ने लोकतांत्रिक पुनर्जन्म की उम्मीदें जगाई थीं.

उन्होंने कहा, “लेकिन फिर हम बांग्लादेश में लोकतंत्र को मजबूत करने में नाकाम रहे और वहां सेना का तख्तापलट हुआ. इरशाद की सत्ता का अंत आखिरी था और 1991 में हम लोकतंत्र की ओर लौटे. हमें सच में उम्मीद थी कि इससे बांग्लादेश में लोकतंत्र का पुनर्जन्म होगा.”

अनाम ने बताया कि इसके बाद बांग्लादेश में कार्यवाहक Governmentों के तहत कई विश्वसनीय चुनाव हुए, लेकिन वे व्यवस्थाएं टिक नहीं पाईं.

उन्होंने आगे कहा कि निष्पक्ष चुनावों को संस्थागत रूप देने के बजाय, हम झगड़ों, आपसी प्रतिद्वंद्विता और फिर बर्बादी की ओर बढ़ते गए.”

अनाम के अनुसार, बांग्लादेश में मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं न बन पाने की वजह यह थी कि “हमने हर उस संस्था का जरूरत से ज्यादा Politicalरण कर दिया, जिसकी कल्पना की जा सकती है.”

उन्होंने कहा कि इस जरूरत से ज्यादा Politicalरण ने हमारी लगभग सभी संस्थाओं की कार्यक्षमता को कमजोर कर दिया है.

उन्होंने आगे कहा कि Political दलों के आधार पर बंटवारा बांग्लादेश के लगभग हर पेशे में फैल गया है, चाहे वे डॉक्टर हों जिनसे सभी मरीजों की सेवा की उम्मीद की जाती है या पत्रकार हों जिनकी विश्वसनीयता निष्पक्षता बनाए रखने पर टिकी होती है.

अनाम ने सवाल किया कि ऐसे पेशे में जहां विश्वसनीयता ही आपकी जान है, आप खुलेआम किसी Political पार्टी का पक्ष लेकर भी यह कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि आपकी विश्वसनीयता बनी रहेगी?

उन्होंने आगे कहा कि Police का इस्तेमाल हमेशा किसी पार्टी की ताकत बढ़ाने वाले हथियार के तौर पर किया जाता है. खुफिया एजेंसियों का इस्तेमाल Political मकसद के लिए होता है. एंटी-करप्शन कमीशन जैसे संस्थान, जिन्हें संवैधानिक संस्थाएं होना चाहिए और जो स्वतंत्र रूप से काम करने चाहिए, वे सभी Political रंग में रंग गए हैं.

–

एमएस/