
चेन्नई, 2 सितंबर . भाजपा की तमिलनाडु इकाई के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने Wednesday को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी जानते हैं कि आगामी चुनावों में उनकी पार्टी की हार निश्चित है और वे पहले से ही परिणाम को समझाने के लिए कारण तलाश रहे हैं.
Maharashtra में एसआईआर के दौरान मसौदा मतदाता सूची में 9.78 करोड़ में से 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए जाने के बाद, राहुल गांधी ने Tuesday को कहा कि भाजपा और “वोट चोरी आयोग” अपनी रणनीति बदलते रहते हैं, और वे “किसी भी कीमत पर भाजपा की जीत” के लिए ऐसा करना जारी रखेंगे.
से बात करते हुए नारायणन ने कहा कि मतदाता सूची के एसआईआर की विपक्ष द्वारा की गई आलोचना का उद्देश्य अपनी संभावित हार के लिए बहाना बनाना था. राहुल गांधी जानते हैं कि उनकी हार निश्चित है. इसलिए वे चाहे जो कहें. जहां तक एसआईआर का सवाल है, वे अदालत गए हैं. लेकिन, अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि चुनाव आयोग जो कर रहा है, वह सही है.
उन्होंने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग ने बार-बार यह प्रदर्शित किया है कि मतदाता सूचियों की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए यह अभ्यास आवश्यक था. जिन लोगों के दो या तीन वोट हैं, या कई वोट हैं या जो मृत हैं या जिन्होंने अपना स्थान बदल लिया है, उन सभी के नाम निश्चित रूप से हटाए जाने चाहिए. इसका विरोध करने के बजाय स्वागत किया जाना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “जहां तक चुनाव आयोग का सवाल है, जी हां, वे बेहद सफल रहे हैं. यह एक बहुत बड़ा सुधार है. इसलिए इसका स्वागत किया जाना चाहिए. राहुल गांधी 2029 के चुनावों में संभावित हार के लिए पहले से ही स्पष्टीकरण तैयार कर रहे हैं. राहुल गांधी अपनी हार से डरे हुए हैं और आने वाले कुछ वर्षों में अपनी हार का कोई कारण ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं. अब राहुल गांधी ने 2029 के चुनावों में अपनी हार सुनिश्चित कर ली है. इसीलिए वे इस तरह की बातें कर रहे हैं.”
नोएडा-दिल्ली बस दुष्कर्म मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रवक्ता ने इस घटना को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा देने की मांग की.
उन्होंने कहा, “ये सब होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और हमें सच में बहुत दुख हुआ है. इस अपराध के दोषियों को हर हाल में तुरंत सजा मिलनी चाहिए. सजा इतनी कड़ी होनी चाहिए कि India में कहीं भी ऐसी घटनाएं न हों.”
मेट्टूर बांध को खोले जाने पर, उन्होंने Government द्वारा किए गए अनावश्यक व्यय की आलोचना की और एक नियमित प्रक्रिया के इर्द-गिर्द Political आयोजन की आवश्यकता पर सवाल उठाया.
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एसएचके/एबीएम
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