राहुल गांधी को सनातन और संघ की समझ नहीं, झूठ बोलना बंद करें: इंद्रेश कुमार

New Delhi, 22 अक्टूबर . राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने राहुल गांधी के संघ में महिलाओं के साथ भेदभाव के आरोपों पर पलटवार किया. इसके साथ ही उन्होंने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के विरोध प्रदर्शन और India की स्थिति की तुलना फ्रांस और बांग्लादेश से किए जाने संबंधी टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी. इंद्रेश कुमार ने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी ताकतें India में अराजकता फैलाने की कोशिश कर सकती हैं.

आरएसएस में महिलाओं के साथ भेदभाव के राहुल गांधी के आरोपों पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि राहुल गांधी को सनातन परंपरा और संघ की कार्यप्रणाली की पर्याप्त समझ नहीं है. राहुल गांधी ने संघ का अध्ययन नहीं किया है और वह लगातार संघ की आलोचना करते हैं. उन्होंने राहुल गांधी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताते हुए उनसे झूठ बोलना बंद करने की अपील की. इंद्रेश कुमार ने कहा कि आरएसएस नारी और पुरुष को एक-दूसरे का पूरक मानता है, न कि प्रतिस्पर्धी. उन्होंने परिवारों में बेटी, बहन और मां के रूप में महिलाओं के सम्मान और नवरात्र के दौरान कन्या पूजन की परंपरा का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा कि संघ का दृष्टिकोण सभी धर्मों के प्रति सम्मान का है. प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पूजा-पद्धति का पालन करना चाहिए और दूसरे धर्मों की निंदा या उनमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. उन्होंने धर्मांतरण के बजाय सभी धर्मों के सम्मान पर जोर दिया.

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा बुद्धिजीवियों के साथ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि इस पूरे मामले में कई सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि इन आंदोलनों के लिए धन कहां से आता है और क्या विदेशी ताकतें India में अराजकता पैदा करने के लिए कुछ समूहों का इस्तेमाल कर रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन की मांगें लगातार बदलती रही हैं. आंदोलन की शुरुआत नीट से जुड़े मुद्दे से हुई, फिर वोट चोरी, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और अंततः सत्ता परिवर्तन की मांग तक पहुंच गई.

इंद्रेश कुमार ने कहा कि आंदोलन के उद्देश्यों में बार-बार बदलाव से उसकी दिशा और स्पष्टता पर सवाल उठते हैं. उन्होंने बांग्लादेश का उल्लेख करते हुए वहां अल्पसंख्यकों और सूफी समुदाय की स्थिति को लेकर सवाल किए. उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रदर्शनकारी India में भी ऐसी परिस्थितियां चाहते हैं.

इंद्रेश कुमार ने कहा कि देश के युवा ऐसे आंदोलनों के साथ नहीं हैं. उन्होंने नवरात्र, मंदिरों और गांवों में आयोजित रामलीलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय समाज में राम और रामायण की परंपरा गहराई से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन दिखाई देने का अर्थ यह नहीं है कि पूरा देश अराजकता का समर्थन करता है. कुछ तत्व विदेशी फंडिंग के जरिए अराजकता की राजनीति कर रहे हैं और उन्हें इसका जवाब देना चाहिए.

India की स्थिति की तुलना फ्रांस और बांग्लादेश से किए जाने संबंधी टिप्पणियों पर इंद्रेश कुमार ने कहा कि India शांति और अहिंसा की परंपरा वाला देश है. उन्होंने बुद्ध, महावीर, गुरु नानक, डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्मा गांधी, भगवान राम और भगवान कृष्ण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज इन सभी परंपराओं का सम्मान करता है. उन्होंने विपक्ष पर हिंसा और अराजकता की भाषा अपनाने का आरोप लगाया. साथ ही कहा कि संविधान की किताब लेकर चलने वाले लोगों को अपने आचरण में भी संवैधानिक मूल्यों का पालन करना चाहिए.

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