राहुल गांधी के सीईसी वाले बयान पर भाजपा ने साधा निशाना, कहा-बयान गैर-जिम्मेदाराना

New Delhi, 25 सितंबर . Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र Government पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद सियासी पारा चढ़ गया है. दरअसल, राहुल गांधी ने कहा था कि वोट की चोरी, कानून की चोरी है. ऐसे में चोरी के वोटों से चुने गए लोगों द्वारा बनाए गए कानून और संस्थागत बदलाव भी गैर-कानूनी होंगे. उन्होंने कहा था कि ज्ञानेश कुमार को सरकारी गवाह बन जाना चाहिए. राहुल गांधी के इस बयान पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

Jharkhand भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने राहुल गांधी के बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की बातों को पूरे देश में कोई भी गंभीरता से नहीं लेता है. वे क्या बोलते हैं, यह खुद उन्हें भी समझ में नहीं आता है. इसलिए उनकी बातों पर चर्चा करना ठीक नहीं है.

आदित्य साहू ने कहा, “राहुल गांधी मानसिक रूप से पूरी तरह से विचलित व्यक्ति हैं. वे क्या बोल रहे हैं, इसका उन्हें खुद पता नहीं होता. इसलिए उनकी बातों पर चर्चा न करना ही देश और देश के लोगों के हित में होगा.”

Jharkhand में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को राहुल गांधी का ठीक से इलाज कराना चाहिए, नहीं तो वे पूरी कांग्रेस पार्टी को ही डुबो देंगे. मरांडी ने कहा, “वे कभी भी कुछ भी बोल देते हैं, जो जनता के गले नहीं उतरता. कांग्रेस को इस पर गंभीरता से सोचना चाहिए.”

भाजपा विधायक सीपी सिंह ने कहा, “वे देश-विरोधी हैं. ऐसा व्यक्ति कुछ भी कहे, उस पर ध्यान नहीं देना चाहिए. उन्हें पहले यह बताना चाहिए कि 2014 से पहले चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे और उन्होंने किस तरह कांग्रेस कार्यकर्ताओं की तरह काम किया.” उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को खुद सरकारी गवाह बन जाना चाहिए और बताना चाहिए कि उन्होंने देश के खिलाफ क्या-क्या किया है और किसके पैसे का इस्तेमाल किया है. अगर वे सरकारी गवाह बन जाते हैं, तो देश की जनता शायद उन्हें माफ कर देगी.”

वहीं, jaipur में भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि राहुल गांधी का स्वभाव ही अनर्गल आरोप लगाना बन गया है. जहां-जहां वे चुनाव हारते हैं, वहां इस तरह की ऊटपटांग बातें करते हैं.

बालमुकुंद आचार्य ने कहा, “राहुल गांधी ने कभी ईवीएम पर सवाल उठाए, कभी बैलेट पेपर पर, कभी चुनाव आयोग पर और कभी इनकम टैक्स और ईडी पर आरोप लगाए. इस तरह की बेबुनियाद बातें करना उनका स्वभाव बन गया है. उनकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. उनकी स्थिति आज यह हो गई है कि वे आज भी 15-20 साल के जेन-जी बच्चों के साथ क्लास ले रहे हैं.”

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पीआईएम/पीएम